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हिंदू पुजारियों ने ग्रेटर नोएडा में रावण की मूर्ति की स्थापना का किया विरोध

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक मंदिर में मंदिर के पुजारियों ने मंगलवार को रावण की मूर्ति की स्थापना की अनुमति नहीं दी |

गाज़ियाबाद में दूधेश्वर नाथ मंदिर के महंत नारायण गिरि, डासना में चंडी देवी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत यति नारिनम्हंद ने कहा कि रावण बुराई का प्रतीक है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी भी मंदिर में रावण की मूर्ति की स्थापना की अनुमति नहीं दी जाएगी | उन्होंने सयुंक्त रूप से कहा कि बिसरख के मंदिर में रावण की मूर्ति स्थापित करने के लिए हिंदू महासभा के अध्यक्ष चक्रपाणि महाराज से अनुमति लेनी होगी | उन्होंने कहा कि ये बहुत ही शर्मनाक कृत्य है रावण बुराई का प्रतीक है, हिन्दू दशहरे पर रावण और उसके भाई कुंभकर्ण के पुतले को जलाते हैं |

इससे पहले, महात्मा रावण मंदिर ट्रस्ट और शिव मोहन मंदिर ट्रस्ट ने ग्रेटर नोएडा में बिसरख गांव में रावण का एक भव्य मंदिर निर्माण करने की घोषणा की थी। दोनों ट्रस्टों के संस्थापक ट्रस्टी अशोकानंद महाराज  ने कहा था कि मंदिर के लिए मूर्ति तैयार है और इसको 11 अगस्त को स्थापित किया जाएगा |

अशोकानंद महाराज ने मीडिया को बताया कि हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे |मंदिर में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण, भगवान गणेश और शनि महाराज की मूर्तियों को भी स्थापित किया जाएगा। मंदिर में नियमित पूजा का प्रबंधन करने के लिए चार पुजारियों को रखा जाएगा |

अपनी भागीदारी की पुष्टि करते हुए स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि भगवान राम के अस्तित्व को रावण के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती।उन्होंने कहा कि रावण एक ज्ञानी ब्राह्मण था जो बहुत अहंकारी था। रामायण में बताया गया है कि रावण के अहंकार को दूर करने के लिए ही भगवान राम ने उसको मारा था |

 

 

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