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हिंदू महासभा ने शरीयत कोर्ट की तर्ज पर बनाई देश की पहली हिंदू कोर्ट

अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने शरियत कोर्ट की तर्ज पर देश में पहले हिंदू कोर्ट की स्थापना की है। महासभा ने इस कोर्ट की स्थापना 15 अगस्त के मौके पर मेरठ में की गई है। इस कोर्ट की स्थापना हिंदू धर्म से जुड़े मामलों के निपटारे के उद्देश्य से की गई है, इसमे दारुल कजा यानि शरियत कोर्ट की ही तरह फैसले सुनए जाएंगे और यहां लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। कोर्ट में बकायदा एक जज की भी नियुक्ति की गई है।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंडित अशोक शर्मा ने बताया कि हमने शरियत कोर्ट को कुछ दिन पहले कोर्ट में चुनौती दी थी, हमने कहा था कि इस कोर्ट को नहीं होना चाहिए क्योंकि संविधान सबके लिए बराबर है। हमने सरकार से भी पत्र लिखकर कहा था कि अगर हमारी मांगों को नहीं पूरा किया जाता है तो हम भी इसी की तर्ज पर हिंदू कोर्ट की स्थापना करेंगे। लेकिन हमारी मांग पर कोई सुनवाई नहीं की गई, जिसके बाद हमने बुधवार को देश की पहली हिंदू कोर्ट बनाने का फैसला लिया है। भाजपा सरकार ने लोगों को बांटने का काम किया महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडे को इस कोर्ट की पहली जज के रुप में नियुक्त किया गया है। जज नियुक्त होने के बाद उन्होंने कहा कि हम हिंदू धर्म से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे, साथ ही हिंदू महिलाओं के साथ शोषण, हिंदू विवाह से जुड़े मुद्दों की भी सुनवाई करेंगे। जब भाजपा सत्ता में आई थी, हमे इस बात की काफी उम्मीदें थी, लेकिन इन लोगों ने जाति के नाम पर बांटों और राज करो की नीति को अपनाना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि पांच वर्ष पहले तक पूजा प्रोफेसर थीं। उन्होंने गणित, कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की है और गणित विषय से एमफिल और पीएचडी भी की है।

अशोक शर्मा ने बताया कि 2 अक्टूबर तक हम कोर्ट के कानून को बनाने का काम पूरा कर लेंगे और कुल पांच जजों की देश के अलग-अलग हिस्सों में 15 नवंबर तक नियुक्त करेंगे। जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि सिविल कोर्ट में पहले से ही लाखों मामले लंबित हैं लिहाजा गरीबों को इंसाफ मिल पाना काफी मुश्किल है, इसलिए हमने हिंदू कोर्ट की स्थापना की है, यहां लोग कम समय में न्याय हासिल कर सकेंगे।

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