हिंद-ओ-पाक में हाकी के उरूज के लिए बाहमी सीरीज़ होना ज़रूरी

हिंद-ओ-पाक में हाकी के उरूज के लिए बाहमी सीरीज़ होना ज़रूरी
पाकिस्तान के ओलम्पिक हाकी स्टार अख़तर रसूल ने कहाकि हिंदुस्तान और पाकिस्तान में हाकी के उरूज का दौर देखा है लेकिन आज वो दोनों ही मुल्कों में हाकी की अबतर हालत पर अफ़्सुर्दा हैं।

पाकिस्तान के ओलम्पिक हाकी स्टार अख़तर रसूल ने कहाकि हिंदुस्तान और पाकिस्तान में हाकी के उरूज का दौर देखा है लेकिन आज वो दोनों ही मुल्कों में हाकी की अबतर हालत पर अफ़्सुर्दा हैं।

उनका एहसास है कि दोनों मुल्कों के माबैन वक़फ़ा वक़फ़ा से हाकी सीरीज़ खेली जाती है तो दोनों ही मुल्कों में हाकी के उरूज के दिन वापिस लाए जा सकते हैं। अख़तर रसूल फ़िलहाल पाकिस्तानी हाकी टीम के हैड कोच और मैनेजर हैं। उन्होंने दोनों मुल्कों हिंदुस्तान और पाकिस्तान की क़ौमी फ़ेडरेशनों पर ज़ोर दिया कि वो बाहमी सीरीज़ किसी तीसरे मुक़ाम पर भी मुम्किन होसके तो करने के लिए मिल जुल कर काम करें।

पहले तो अपने मुल्कों ही में ऐसी सीरीज़ होनी चाहिए और अगर ऐसा मुम्किन ना होसके तो किसी तीसरे मुक़ाम पर सीरीज़ की जानी चाहिए। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान ऐसे ममालिक हैं जिन्होंने दुनिया को हाकी सिखाई है लेकिन आज वो अपना खोया हुआ वक़ार दुबारा हासिल करने के लिए जद्द-ओ-जहद कर रहे हैं।

उनका एहसास है कि हमें एक दूसरे के ख़िलाफ़ मज़ीद मैचस् खेलने चाहिये। हम एक दूसरे से नहीं खेल रहे हैं। यही वजह है कि योरोपी टीमें हमें मात‌ दे जाती हैं। वो एशिया कप हाकी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने यहां आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम एक दूसरे के साथ मज़ीद मैचस् खेलें तो हम‌ समझते हैं कि हम धीरे धीरे अपने खेल में बेहतरी पैदा करते हुए एक बार फिर दुनियाए हाकी पर अपना सिक्का जमा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर हम एक दूसरे के ख़िलाफ़ अपने मुल्कों में ना खेल पाए तो हम किसी तीसरे मुल्क में खेल सकते हैं जैसा क्रिकेट में होता है। हम को सिर्फ़ हौसला पैदा करने की ज़रूरत है। अख़तर रसूल साबिक़ सैंटर हाफ हैं और उन्होंने 1978 और 1982 में गोल्ड मैडल जीतने वाली पाकिस्तानी ओलम्पिक टीमों में शामिल थे।

हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी टीमें जारिया साल दोनों मुल्कों में एक एक सीरीज़ खेलने वाली थीं लेकिन सेक्योरिटी वजूहात की बिना पर हिंदुस्तान ने उसकी इजाज़त नहीं दी जिस के बाद ये सीरीज़ खत्म‌ करदी गई । पाकिस्तान की हाकी टीम जारिया साल माह अप्रैल में पाँच टेस्ट मैचस् के लिए हिंदुस्तान का दौरा करनेवाली थी जिस के नतीजा में दोनों मुल्कों के माबैन हाकी सीरीज़ का तक़रीबन सात साल बाद अमल में आसकता था।

पाकिस्तान के मैचस् रांची, लखनऊ, दिल्ली, मोहाली और जालंधर में होने वाले थे जबकि उसके बद हिंदुस्तानी टीम पाकिस्तान का दौरा करनेवाली थी और वहां पाँच मैचस् लाहौर, फैसलाबाद, कराची और स्यालकोट में होने वाले थे। अख़तर रसूल ने अपने तौर पर हिंदूस्तानी हाकी टीम को पाकिस्तान का दौरा करने की दावत दी है।

उन्होंने कहा कि हम हमेशा हिंदुस्तान का ख़ैर मुक़द्दम करते हैं। अपनी जानिब से वो हिंदुस्तानी अवाम और हुकूमत को ये यकीन‌ देना चाहते हैं कि हम पाकिस्तान में टीम इंडिया को मुकम्मल सेक्योरिटी फ़राहम करेंगे। उन्होंने कहा कि पावर प्ले के के बाद गुजिश्ता कुछ सालों में हाकी के खेल के बुनियादी उसूल बड़ी हद तक बदल कर रह गए हैं।

उन्होंने कहा कि अब हाकी पावर गेम होगई है। हाकी पूरी तरह बदल कर रह गई है। योरोपी अक़्वाम अब इस खेल पर अपनी इजारादारी बनाए हुए हैं लेकिन जब इस खेल के फ़न के ताल्लुक़ से कोई ग़ौर करे तो उसे पता चलेगा कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान की टीमें हमेशा इस मुआमले में दूसरी से बेहतर और आगे रही हैं।

आठ क़ौमी एशिया कप हाकी टूर्नामेंट में हर टीम के लिए कामयाबी हासिल करनी ज़रूरी है और हिंदुस्तान और पाकिस्तान की टीमों को 1971 के बाद से पहली मर्तबा वर्ल्ड कप में शामिल‌ से महरूमी के अंदेशे लाहक़ हैं। अख़तर रसूल ने ताहम कहा कि वर्ल्ड कप में हिंदुस्तान और पाकिस्तान की टीमों को शामिल होना चाए।

उन्हें यक़ीन है कि ये टीमें एशिया कप में एक दूसरे के ख़िलाफ़ फाईनल तक पहूंचेंगे। ऐसा होना एशियाई हाकी के लिए बेहतर होगा। उन्हों ने कहा कि हाकी दुनिया को हिंदुस्तान और पाकिस्तान की ज़रूरत है। अगर वर्ल्ड कप को मक़बूल बनाना है तो इन दोनों टीमों की शामिल होना बहुत अच्छी साबित होगी और दोनों टीमों को इस में जगह हासिल करनी चाहिए।

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