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हिंद-चीन सरहदी मसले की मुज़ाकरात के ज़रिए यकसूई मुम्किन

शी चिनफिंग खुला ज़हन रखने वाले और हक़ीक़तपसंद, दलाईलामा ने सताइश की, दाइश कार्यवाईयों की मज़म्मत

शी चिनफिंग खुला ज़हन रखने वाले और हक़ीक़तपसंद, दलाईलामा ने सताइश की, दाइश कार्यवाईयों की मज़म्मत

सदर चीन शी चिनफिंग की आज ग़ैर मुतवक़्क़े शोबा से तारीफ़-ओ-तहसीन की गई। वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी और सदर चीन की बातचीत को पेशे नज़र रखते हुए तिब्बत के जिलावतन रहनुमा दलाईलामा ने उनकी तारीफ़ करते हुए कहा कि वो खुला ज़हन रखने वाले और हक़ीक़तपसंद हैं।

दलाईलामा ने हिंद-चीन बाहमी रवाबित का इन्हिसार एक दूसरे पर यक़ीन करने में है और इसका फ़ायदा ना सिर्फ़ एशीया बल्कि सारी दुनिया को होगा। उन्होंने हिन्दुस्तान के सरहदी मसले का चीन के साथ तिब्बत के जारी मसले को मरबूत करते हुए कहा कि सिर्फ़ बातचीत के ज़रिए ही ये मसला हल किया जा सकता है और इसे ताक़त से हल नहीं किया जा सकता।

दलाईलामा का ये तबसरा एसे वक़्त सामने आया जबकि सदर चीन शी चिनफिंग और वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के माबैन बातचीत जारी है। साथ ही साथ चीन और हिन्दुस्तानी फ़ौज के माबैन चूमर गांव में तात्तुल पैदा होगया है। ये हिमाचल प्रदेश और लेहा से शुमाल मशरिक़ी सिम्त तक़रीबन 300 किलो मीटर दूर वाक़्य है।

दलाईलामा ने कहा कि तिब्बत का मसला भी हिन्दुस्तान का मसला है। उन्होंने कहा कि शी चिनफिंग ज़्यादा हक़ीक़तपसंद और खुला ज़हन रखने वाले हैं और उन्हें हिन्दुस्तान में मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब के माबैन हम आहंगी से सबक़ हासिल करना चाहिए। दलाईलामा ने कहा कि दरहक़ीक़त तिब्बत का मसला भी हिन्दुस्तान का मसला ही है।

1950 से पहले तमाम शुमाली सरहद पुरअमन थी वहां कोई सिपाही नहीं था चुनांचे अब जो मसला हुआ है वो हिन्दुस्तान का मसला है। उन्होंने कहा कि जल्द या बह देर इस मसले को हल करना होगा लेकिन ये ताक़त के ज़रिए नहीं बल्कि बातचीत के ज़रिए हल किया जाना चाहिए क्योंकि बातचीत से ही एक दूसरे को समझने में मदद मिलती है।

दलाईलामा ने इराक़ और शाम में आई एस आई एस के क़तल-ए-आम की भी मज़म्मत की और कहा कि इस्लाम को मानने वालों की जानिब से बेक़सूर अवाम की इस तरह हलाकत पर उन्हें हैरत है। उन्होंने कहा कि इस्लाम की तालीमात पर अमल करने वाला हक़ीक़ी मुसलमान कभी ख़ूँरेज़ी में मुलव्विस नहीं होसकता।

जिहाद का मतलब दूसरों को नुक़्सान पहुंचाना नहीं बल्कि ये ख़ुद अपने अंदर पाए जाने वाले मनफ़ी एहसासात को ख़त्म करने का नाम है। हैरत इस बात पर है कि अल्लाह पर यक़ीन रखने वाले इराक़ में मुसलमानों का बेरहमी से क़तल कररहे हैं। दलाईलामा ने कहा कि एक मुसलमान अल्लाह की तमाम मख़लूक़ से मुहब्बत रखता है और सच्चा मुस्लिम किसी दूसरे इंसान के साथ नरमी और रहम का बरताओ करता है।

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