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हिंसा और दंगों पर काबू पाने में भाजपा सरकार सफल

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यह दावा किया है कि केंद्रीय भाजपा सत्ता में आने के बाद पिछले 18 महीने के दौरान विद्रोही की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और असम में सभी उग्रवादियों से अपील है कि निरस्त्रीकरण करते हुए बातचीत‌ के लिए आगे बडे।

उन्होंने यहां चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि देश भर में विद्रोही की स्थिति में सुधार हुआ है और पिछले 18 महीनों में पूरा नियंत्रण में है और यह दावा मेरा नहीं है बल्कि राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने खुद यह बताया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि असम में हत्या और खून की घटनाओं आम हो गए थे लेकिन 2014 में जब उग्रवादियों से आदिवासी मारे गए तो मैंने तुरन्त गुवाहाटी पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

यह स्पष्ट कर दिया कि हिंसा और आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में सभी उग्रवादियों को यह सन्देश देता हूँ कि हिंसा का रास्ता छोड़ दें। अगर उन्हें कोई समस्या है तो हथियार छोड़कर बातचीत के लिए आगे आएं और हम (गृह मंत्री) बातचीत के जरिए सभी समस्याओं को हल करने के लिए तैयार हैं।बशर्ते वे हिंसा और निर्दोष लोगों की हत्याओं से बाज़ आ जाएं।

उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की सीमा से हस्तक्षेप कारों के साथ नकली मुद्रा भी आयात की जा रही है कि हमारे लिए चिंता का विषय है। गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि असम में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने कभी इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया लेकिन हम इस समस्या की यकसूई के कार्यकाल के लिए प्रतिबद्ध हैं और पड़ोसी देश से नकली मुद्रा के प्रवेश को रोकने जाएगा।

कांग्रेस को कोसने कानिशाना बनाते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का आरोप है कि भाजपा हिंसा भड़का रही है लेकिन तथ्य यह है कि कांग्रेस शासित ज्यादातर राज्यों में हिंसक और दंगों के घटनाएं हैं। उन्होंने बताया कि असम में 1983 के दंगे और दिल्ली में 1985 का दंगा कांग्रेस के शासनकाल पेश आए हैं और कांग्रेस को निराधार आरोप लगाने से पहले अपने गरीबां में झांकना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र में भाजपा के दो साल सत्ता में दुर्घटना का एक भी आरोप नहीं आया है कि भाजपा का खास विशेषता है।

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