हिन्दुओं की तरह मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाए

हिन्दुओं की तरह मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाए
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फैसल फरीद, लखनऊ: ट्रिपल तलाक के विरोध में ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने मांग की है कि हिन्दु मैरिज एक्ट की तरह मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाए। मुस्लिम महिला संघठन ने दखल देते हुए कहा है कि अगर ये एक्ट बनाया जाएगा तो इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी। बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने बताया कि बोर्ड  इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और उनके बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर ऐसा किया जाना जरूरी है।

शाइस्ता ने कहा कि बोर्ड सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगा कि वो केंद्र सरकार को निर्देशित करे कि हिन्दु मैरिज एक्ट की तरह ही मुस्लिम शरीयत को ध्यान में रखकर मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जाए। इस बात का ध्यान रखा जाए कि तलाकशुदा महिला को दूसरी शादी या खुद-मुख्तार होने तक पति उसका भरण-पोषण करे।  बच्चों को 18 साल के होने तक  या फिर उनकी शिक्षा जारी रहने तक पिता उसका खर्च उठाए। उन्होंने कहा शराब के नशे में,  एसएमएस, ईमेल या गुस्से में तलाक देना इस्लामी शरीयत के मुताबिक सही नहीं है।

हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने कॉमन सिविल कोड का विरोध किया। बोर्ड ने कहा कि यह किसी भी सूरत में मंज़ूर नहीं किया जाएगा। पहले केंद्र सभी बिंदुओं को सामने रखे। सरकार किस तरह इसे लागू करना चाहती बोर्ड उनका पक्ष जानना जरूरी है। शाइस्ता अम्बर ने कहा कि तलाकशुदा महिलाओं के गुजारे-भत्ते की ज़िम्मेदारी वक़्फ़ बोर्ड के अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी संयुक्त रूप से उठाने चाहिए।

उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर बात करते हुए कहा कि नमाज़ में महिलाओं के लिए अलग से प्रबंध होना चाहिए। उनकी अलग से जमात की व्यवस्था की जानी चाहिए। आमतौर पर मुस्लिम महिलाएं मस्जिदों में नमाज़ नहीं पढ़ती हैं। हलाला मसले पर शाइस्ता ने कहा कि यह एक ज़लील हरकत है और यह महिला के अधिकारों का हनन है। इसके साथ-साथ उन्होंने कुछ मुफ्तियों और तलाक़ कराने वाले मौलवियों को भी आडे-हाथों लिया। उन्होंने कहा कि दारुल क़ज़ा से महिलाओं को इंसाफ नहीं मिलता इसलिए ज़रूरी है कि दारुल क़ज़ा में महिला मुफ़्ती की भी नियुक्ति किया जाए। शाइस्ता पिछले साल तब चर्चा में आई थीं जब उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से लखनऊ में मुलाकात की थी।

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