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हिन्दुस्तानी मुसलमान मुहब्बत-ओ-रवादारी के हामी

नई दिल्ली: शाही इमाम मस्जिद फ़तहपोरी दिल्ली मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने आज नमाज़-ए-जुमा से क़बल ख़िताब में कहा कि पैग़ंबर इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुहसिन इन्सानियत हैं और क़ुरआन-ए-करीम अल्लाह ताला की आख़िरी किताब है 4जो इन्सानियत की मुकम्मल रहनुमाई अंजाम दे रही है।

हिन्दोस्तान के मुसलमान इसी के मुताबिक़ अपनी ज़िन्दगी गुज़ारते आरहे हैं, वो मज़हबी नफ़रत और फ़िर्कापरस्ती से बहुत दूर हैं। अख़लाक़ और आला इन्सानी इक़दार की पैरवी करते हुए वो बिरादरान वतन के साथ ख़ुशगवार ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं उन्हें फ़िर्कापरस्ती और दहशतगर्दी से जोड़ना हिट धर्मी है।

शाही इमाम ने कहा कि बड़े अफ़सोस की बात है कि हिन्दुस्तान की सुप्रीमकोर्ट इन्साफ़ दिलाने में सुस्त-रवी का शिकार नज़र आरही है। मुंबई हाईकोर्ट के दो सीनियर वुकला ने हाल ही में सुप्रीमकोर्ट के चीफ़ जस्टिस और इंडियन हियूमन राईट्स कमीशन को ख़ुतूत लिख कर मुतालिबा किया कि 17साल से सुप्रीमकोर्ट के सामने श्री कृष्णा कमीशन रिपोर्ट के नफ़ाज़ के बारे में जो पेटीशन ज़ेर-ए-ग़ौर है इस का फ़ैसला जल्द किया जाये ताकि मुंबई हाइकोर्ट आगे की कार्रवाई अंजाम दे सके।

माम‌ला सुप्रीमकोर्ट में ज़ेरे इलतिवा होने से मुंबई हाईकोर्ट इस पर कोई समात नहीं कर पा रही है और सुप्रीमकोर्ट ने इतने अहम मसला पर992 के फ़सादात‌ मुतास्सिरीन को राहत रसानी में ग़फ़लत करके इन्साफ़ का ख़ून किया है।993 के मुक़द्दमे में तो सुप्रीमकोर्ट शब-ओ-रोज़ समात करता हुआ नज़र आता है लेकिन 1992के मुक़द्दमात को नजरअंदाज़ किया जा रहा है।

सुप्रीमकोर्ट को ये दोहरे मियार जे़ब नहीं देता ।शाही इमाम डाँक्टर मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया और क़ौमी इन्सानी हुक़ूक़ कमीशन से पुरज़ोर अपील की है कि मुंबई हाईकोर्ट के वुकला के ख़ुतूत की रोशनी में जल्द अज़ जल्द फ़ैसला किराया जाये ताकि मुंबई हाईकोर्ट सिरी कृष्णा कमीशन सिफ़ारिशात के बारे में ज़ेरे अलतवा मुक़द्दमा की समात जल्द अज़ जल्द मुकम्मल करसके। हमें यक़ीन है कि 1992 के दिल लरज़ाने वाले फ़सादात‌ के मुतास्सिरीन को ज़रूर इन्साफ़ दिलाया जाएगा।

शाही इमाम ने कहा कि हज 2015बहुत क़रीब है। आज़मीन की रवानगी के प्रोग्राम मुरत्तिब किए जा चुके हैं, तर्बीयती कैंप भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने हज कमेटी आफ़ इंडिया से अपील की कि आज़मीन-ए-हज के लिए एय‌र पोर्ट से लेकर सऊदी अरब में हर जगह पर बेहतर इंतेज़ामात को यक़ीनी बनाया जाये। उन्होंने कहा कि आज़मीन से क़ुर्बानी की क़ीमत लेने पर इसरार ना किया जाये ये ख़ालिस मज़हबी मसला है इस का हज कमेटी के इंतेज़ामात से कोई ताल्लुक़ नहीं है।

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