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हिन्दुस्तान की एफ डी आई पालिसी पर नज़रसानी का मुतालिबा

नई दिल्ली 13 जुलाई (पी टी आई) मौजूदा रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी पालिसी के ब्राउन फ़ील्ड सरमायाकारीयों पर जो अदविया साज़ी के शोबे पर असरअंदाज़ होंगी शदीद फ़िक्रमंदी ज़ाहिर करते हुए मर्कज़ी वज़ीर‍-ए‍-तिजारत आनंद शर्मा ने वज़ीर-ए-आज़म मनमो

नई दिल्ली 13 जुलाई (पी टी आई) मौजूदा रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी पालिसी के ब्राउन फ़ील्ड सरमायाकारीयों पर जो अदविया साज़ी के शोबे पर असरअंदाज़ होंगी शदीद फ़िक्रमंदी ज़ाहिर करते हुए मर्कज़ी वज़ीर‍-ए‍-तिजारत आनंद शर्मा ने वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह पर ज़ोर दिया कि एक आला सतही जायज़ा इजलास तल्ब किया जाये ताकि इस मामले पर ग़ौर किया जा सके।

वज़ीर‍-ए‍-तिजारत आनंद शर्मा ने वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह के नाम अपने मकतूब में तहरीर किया कि अदविया साज़ी के शोबे में रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी ना तो पैदावारी सहूलतों के क़ियाम के लिए एतबार से एक इज़ाफ़ा साबित हुई है और ना उसकी वजह से मुल्क में इमारात-ओ-शवारा का शोबा मुस्तहकम हुआ है।

ये हक़ीक़तें ब्राउन फ़ील्ड अदविया साज़ी की रास्त ग़ैर मुल्की सरमाया कारी पालिसी पर नज़रसानी करने के लिए मजबूर करती हैं। उन्होंने कहा कि में वज़ीर-ए-आज़म पर ज़ोर देना चाहता हूँ कि वो एक आला सतही जायज़ा इजलास फ़ौरी तल्ब करें जिस में मर्कज़ी वज़ीर फाईनानस, वज़ीर-ए-सेहत, वज़ीर अदविया साज़ी और मुझे इस मामले पर ग़ौर के लिए शामिल किया जाये।

वज़ारत तिजारत ने वाज़िह तौर पर इस हक़ीक़त पर अंदेशा ज़ाहिर किया कि अदविया साज़ी के शोबे में रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी का ज़्यादा तर हिस्सा मौजूदा शाख़ों (ब्राउन फ़ील्ड सरमायाकारीयों) से आरहा है।

आनंदशर्मा ने कहा कि अगर यही रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी पालिसी जारी रहे तो हमारे मुल्क की सलाहीयत बतदरीज ख़त्म होजाएगी। आख़िर-ए-कार हिन्दुस्तान ज़िंदगी बचाने वाली अदविया पर जो देसी साख़ता हो या ग़ैर मुल्की कंपनीयों की तैय्यार करदा हो जिन्हें दरआमद किया गया हो, इन्हिसार करने पर मजबूर हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि कई अहम अदविया ज़ाए हो चुकी हैं और हिन्दुस्तान पहले ही से दरमियानी आदमीयों और अहम दवाओं जैसे पेनिसिलिन दरआमद करने पर मुनहसिर होगया है। ये शदीद तशवीश का मामला है।

रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया की मालूमात के बमूजब अप्रैल 2012 और अप्रैल 2013 के दरमियान 98 करोड़ 90 लाख अमरीकी डालर मालियती रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी ब्राउन फ़ील्ड सरमायाकारी के शोबे में हासिल हो चुकी है जबकि ग्रीन फ़ील्ड सरमायाकारीयों में सिर्फ़ 8 करोड़ 73 लाख अमरीकी डालर हासिल हुए हैं।

वाज़िह तौर पर अदविया साज़ी में बेशतर रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी इस मुद्दत के दौरान ब्राउन फ़ील्ड की थी चुनांचे घरेलू सरमाया में ग़ैर मुल्की सरमाया से कोई इज़ाफ़ा नहीं हुआ। महिकमा सनअती पालिसी-ओ-फ़रोग़ सनअत पहले ही जारीया माह अंदरून-ए-मुल्क अदविया साज़ कंपनीयों के कसीर क़ौमी कंपनीयों से ख़रीदारी के रुजहान पर अंदेशे ज़ाहिर करचुका है।

रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी का 90 फ़ीसद से ज़्यादा हिस्सा ब्राउन फ़ील्ड अदविया साज़ी से हासिल होता है। कोई वजह होना चाहीए कि रास्त ग़ैर मुल्की सरमायाकारी नए प्रोजेक्टस में क्यों नहीं की जा रही है। क्या ये पालिसी के मतलूबा नताइज फ़राहम कररहे हैं।

क्या ये प्रोजेक्टस अवामी अंदेशों का अज़ाला कररहे हैं। डी आई पी पी के सेक्रेटरी सौरभ चंद्रा ने कहा कि मौजूदा पालिसी के बमूजब हुकूमत को रास्त ग़ैरमुल्की सरमायाकारी ब्राउन फ़ील्ड माम‌लात में करने के लिए साज़गार शराइत फ़राहम करनी चाहीए।

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