हिन्दुस्तान की शरह तरक़्क़ी आर बी आई रिपोर्ट से भी कम मुतवक़्क़े

हिन्दुस्तान की शरह तरक़्क़ी आर बी आई रिपोर्ट से भी कम मुतवक़्क़े
तवक़्क़ो के मुताबिक़ आर बी आई के गवर्नर रग्घू राम राजन ने आज कलीदी पालिसी शरह (रेपो) को तबदील नहीं किया क्योंकि चिल्लर फ़रोशी का इफ़रात-ए-ज़र हुनूज़ बरक़रार है एसे इक़दामात मुतआरिफ़ करवाए जिन से सरमाया मंडी की तग़य्युर पज़ीरी पर क़ाबू पाय

तवक़्क़ो के मुताबिक़ आर बी आई के गवर्नर रग्घू राम राजन ने आज कलीदी पालिसी शरह (रेपो) को तबदील नहीं किया क्योंकि चिल्लर फ़रोशी का इफ़रात-ए-ज़र हुनूज़ बरक़रार है एसे इक़दामात मुतआरिफ़ करवाए जिन से सरमाया मंडी की तग़य्युर पज़ीरी पर क़ाबू पाया जा सकेगा। आर बी आई ने अपने पहले दो माही मालीयाती पालिसी बयान में मुख़्तसर मुद्दती क़र्ज़ की शरह या रेपो रेट को तबदील नहीं किया और उसे 8 फ़ीसद बाक़ी रखा।

नक़द रक़म के महफ़ूज़ ज़ख़ाइर का तनासुब चार फ़ीसद बरक़रार है। रातों रात ये निस्फ़ होगया था और रक़म की शरह 0.25 फ़ीसद होगई थी जो 7 दिन और4 दिन की रेपो हुदूद मीनाली उल-तरतीब 0.75 फ़ीसद और 0.50 फ़ीसद थी। रिज़र्व बैंक ने आज मआशी तौसीअ को साबिक़ा तवक़्क़ुआत 8 फ़ीसद से ज़्यादा की बनिसबत कम कर के उसे फ़ीसद मुक़र्रर किया क्योंकि शरह तरक़्क़ी का रुजहान 5 फ़ीसद से भी कम है।

तख़मीनों का एक वसीअ दायरा मुतबादिल टेक्निक्स इस्तेमाल करते हुए मुतवाज़िन किया गया। इस से ज़ाहिर होता है की मुतवक़्क़े शरह तरक़्क़ी 6 फ़ीसद से भी कम होगी । आज की रिज़र्व बैंक की मालीयाती रिपोर्ट की ख़ास झलकियां हसब-ए-ज़ैल रही।*मुख़्तसर मुद्दती क़र्ज़ की (रेपो)शरह 8 फ़ीसद तबदील नहीं की गई।* इफ़रात-ए-ज़र में इज़ाफे की शरह मुसलसल इन्हितात पज़ीर है।* 2014-15 केलिए मुतवक़्क़े मआशी शरह तरक़्क़ी 5.5फ़ीसद है ।

* करंट अकाउंट ख़सारा तवक़्क़ो है कि 2014-15 में कम होकर जी डी पी का 2 फ़ीसद होजाएगा। *चिल्लर फ़रोशी का इफ़रात-ए-ज़र तवक़्क़ो है कि 2014 में 6 फ़ीसद से कम रहेगा । * आर बी आई ने बैंकों से ख़ाहिश की है कि अक़ल्ल तरीन जमा रक़म एसे खातों केलिए जो कारकरद ना हो बरक़रार रखने से क़ासिर रहने पर जुर्माना आइद ना करें।

*नई बैंकों के लाईसैंस इलेक्शन कमीशन से मुशावरत के बाद मंज़ूर किए जाऐंगे। * आर बी आई ने बैंकों के इंज़िमाम के सिलसिले में खुला ज़हन ज़ाहिर किया है और कहा कि मुसाबक़त और इस्तेहकाम की क़ीमत पर समझौते नहीं किए जाऐंगे । *सनअती सरगर्मी मईशत पर बोझ बरक़रार रहेगी। * आर बी आई मआशी ख़िदमात हर एक केलिए ज़्यादा से ज़्यादा क़ाबिल रसाई बनाने केलिए टेक्नालोजी और नए प्रोग्राम इस्तेमाल किए जाऐंगे ।

* तरजीही शोबा पर दबाव‌ की सूरत में अज़ीम तर मआशी रसाई केलिए क़र्ज़ फ़राहम किया जाएगा । *आज पहली दो माही मालीयाती पालिसी का जायज़ा लिया गया। आइन्दा जायज़ा 3 जून को मुक़र्रर किया गया है। अगर इफ़रात-ए-ज़र जनवरी 2013 के आठ फ़ीसद और इस के बाद के साल में छः फ़ीसद था और अब भी इफ़रात-ए-ज़र में इन्हितात की यही शरह बरक़रार रहे तो गवर्नर आर बी आई ने तैकून दिया कि अश्या-ए-ज़रुरीया की क़ीमतों में मज़ीद इज़ाफे का इमकान नहीं है।

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