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हिन्दुस्तान के कई ऐसे गांव जहां मुसलमानों के साथ हिन्दू भी रोजा रखते हैं

बाड़मेर। जिले से लगती पाकिस्तान की सीमा के निकट सीमावर्ती गांवों मे बसे हिन्दू परिवार भी रमजान में रोजे रखकर सर्वधर्म समभाव की मिसाल कायम कर रहे हैं। रमजान मे अनेक हिन्दूओं ने पांच रोजे रख कर आपसी भाईचारे का संदेश दिया है। यहां हिन्दूओं के लिए रोजे रखना कोई नई बात नहीं है।

दोनो समुदायों की वेश-भूषा, खानपान, रहन-सहन और रीति-रिवाज मे कोई अंतर नहीं है। गोहड़ का तला निवासी प्राचार्य डॉ. मेघाराम गढ़वीर बताते हैं कि सीमावर्ती गांवों मे मुस्लिम हिन्दूओं के त्योहार पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं, वहीं हिन्दू परिवार भी रमजान के पवित्र महीने मे रोजे रखकर मुस्लिम भाईयों की खुशी मे शामिल होते हैं। विभाजन और उसके बाद भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों के दौरान भारत आए हिन्दू और मुस्लिम परिवार मे समान रीति रिवाज हैं।

हिन्दूओं मे विशेषकर मेघवाल जाति के परिवार सिंध के महान संत पीर पिथोरा के अनुयायी हैं। रोजा रख रहे शंकराराम ने बताया की हम सिंधी मुसलमान पीर पिथोरा के प्रति समान आस्था रखते हैं। पीर पिथोरा के जितने भी अनुयायी हैं, वे रमजान में रोजे रखते हैं। रमजान में तो हिन्दू मुस्लिम के साथ रोजे रखते हैं।

एक दूसरे के यहां इफ्तार भी करते है सरहद पार रह रहे हिन्दू मुस्लिम परिवारों के रीति रिवाजों में भी कोई फर्क नहीं है। हिन्दू परिवारों के छोटे छोटे बच्चे भी रोजे रखते हैं। यहां के मुस्लिमों का कहना है कि जिस तरीके से मुस्लिम रोजे रखते हैं, उसी तरह हिन्दू भाई भी पांच रोजे रखते हैं, इससे आपसी भाईचारा बढ़ता है।

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