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हिन्दुस्तान में गंदगी, सड़कों पर नहीं बल्के हमारे ज़हनों में मौजूद:परनब मुख़र्जी

अहमदाबाद 02 दिसंबर: हिन्दुस्तान की हक़ीक़ी गंदगी सड़कों पर नहीं  बल्के हमारे ज़हनों में है और हमारी इस तबीयत में है जो एसे नज़रियात को मुस्तर्द करने से गुरेज़ नहीं करती जो समाज को तक़सीम कर रही है।

सदर जमहूरीया परनब मुख‌र्जी ने ये बात कही और हमारे ज़हनों की सफ़ाई पर-ज़ोर दिया। साबरमती आश्रम में एक तक़रीब से ख़िताब करते हुए सदर जमहूरीया ने गांधीजी के हिन्दुस्तान के बारे में नज़रिये का हवाला दिया जो एक एसा मुल्क़ होगा जिसमें आबादी का हर तबक़ा किसी इमतियाज़ के बग़ैर ज़िंदगी गुज़ारेगा और सबको मसावी मवाक़े हासिल होंगे।

उन्होंने कहा कि इन्सानियत की असल बुनियाद हमारे एक दूसरे पर भरोसे में है। उन्होंने कहा कि हर दिन हम अपने अतराफ़-ओ-अकनाफ़ के माहौल में ग़ैरमामूली तशद्दुद देख रहे हैं। इस तशद्दुद की बुनियाद तारीकी, ख़ौफ़ और अदम एतेमाद है जहां हम इस बढ़ते तशद्दुद से निमटने के लिए मुख़्तलिफ़ तरीक़े अपना रहे हैं, वहीं हमें अदम तशद्दुद, मुज़ाकरात और वाजबीयत की ताक़त को नहीं भूलना चाहीए।

सदर जमहूरीया परनब मुख‌र्जी दादरी क़त्ल और माबाद मुसलसिल पेश आरहे वाक़ियात के बाद से मुसलसिल अदम रवादारी के ख़िलाफ़ बातें कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अहमसा (अदम तशद्दुद) कोई मनफ़ी ताक़त नहीं। हमें इस बात को यक़ीनी बनाना होगा कि हम अपने अवाम को हर शक्ल में पाए जानेवाले तशद्दुद ख़ाह वो जिस्मानी हो या लिसानी, महफ़ूज़ रखना होगा।सिर्फ एक अदम तशद्दुद पर मबनी समाज ही अवाम के तमाम तबक़ात खास्कर नजरअंदाज़ किए जाने वालों और बिछड़े लोगों की हमारी जमहूरी अमल में शराकत को यक़ीनी बना सकता है।

सदर जमहूरीया ने कहा के गांधीजी के विरसे को अमली जामा पहनाने के मुआमले में आख़िरी शख़्स को तक ज़हन में रखा जाये। हिन्दुस्तान में ये आख़िरी फ़र्द अक्सर एक ख़ातून, एक दलित या एक आदि वासी होते हैं। हमें ये ग़ौर करना होगा कि क्या हमारे अमली इक़दामात उस के मुताबिक़ हैं? हमें चाहीए कि ग़रीब तरीन शख़्स को बाइख़तियार बनाएँ।

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