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हिन्दू आश्रम में मुक़ीम बहनें अस्मा और नजमा घर वापसी की ख़ाहां

हैदराबाद ।२२। अगस्त : ( अब्बू अमल ) : माह की ममता बाप की शफ़क़त और भाईयों का प्यार किसी भी इंसान के लिए बहुत बड़ी ताक़त-ओ-हौसले का बाइस होते हैं और अल्लाह ताली की इन नेअमतों का जितना भी शुक्र किया जाय कम है । जिस किसी के पास ये नेअमतें हो

हैदराबाद ।२२। अगस्त : ( अब्बू अमल ) : माह की ममता बाप की शफ़क़त और भाईयों का प्यार किसी भी इंसान के लिए बहुत बड़ी ताक़त-ओ-हौसले का बाइस होते हैं और अल्लाह ताली की इन नेअमतों का जितना भी शुक्र किया जाय कम है । जिस किसी के पास ये नेअमतें होती हैं वो बड़ा ख़ुशनसीब होता है लेकिन जो इन नेअमतों से महरूम होते हैं उन के दर्द-ओ-अलम करब-ओ-बेचैनी और एहसास-ए-महरूमी का तसव्वुर कर के ही दिल काँप जाता है लेकिन अल्लाह ताली अपने बंदों से सत्तर माओ से ज़्यादा मुहब्बत रखता है । यही वजह है कि वो गिरतों को थाम लेता है ।

डूबतों को बचा लेता है , कमज़ोरों-ओ-नातवानों को ताक़त अता फ़रमाता है । बे सहारों का सहारा , बे आसरों का आसरा बन जाता है और दुनिया जिस से दूर होती है इस के क़रीब होजाता है । ऐसे लोगों की परवरिशका इंतिज़ाम भी करता है जिस के ज़िंदा रहने की उम्मीद भी बाक़ी नहीं रहती । अल्लाह ताली ने ऐसा ही मुआमला अस्मा-ए-और नजमा नामी दो ग़रीब बेबस-ओ-बेसहारा बहनों के साथ भी किया । वालिदा की मौत , बाप की शराबनोशी , भाईयों की बेराह रवी के बाइस मुसलसल फ़ाक़ाकशी का शिकार ये लड़कीयां जब मौत के मुंह में पहूंच ही चुकी थी कि अल्लाह ताली ने उन की मदद फ़रमाई ।

लोगों के दिलों में रहम डाला और आज ये दोनों बहनें बिलकुल सेहत मंद-ओ-तंदरुस्त हैं । कस्तूरबा गांधी आश्रम लंगर हौज़ हैदर शाहकोट में मुक़ीम ये दोनों मुस्लिम लड़कीयां इस बात की मुंतज़िर हैं कि इन का अपना कोई आए और उन्हें अपने घर ले चले । क़ारईन आप को बतादें कि 7 फरवरी 2007 को उर्दू अंग्रेज़ी तलगो अख़बारात में इन दो बहनों की उल-मनाक दास्तान शाय हुई थीं जो अपने घर में तन्हाई और मुसलसल फ़ाक़ाकशी का शिकार हो कर ज़हनी तवाज़ुन खो चुकी थीं जब कि अड़ोस पड़ोस को भी इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि पड़ोस में रहने वाली ये लड़कीयां काफ़ी दिनों से फ़ाक़ाकशी का शिकार हैं ।

मुनासिब देख भाल से महरूमी ने उन की अजीब-ओ-ग़रीब हालत करदी है । उन्हें अपनी सेहत तो दूर साफ़ सफ़ाई का ख़्याल तक नहीं रहा । अगर अल्लाह ताली पड़ोसीयों के दिलों में इन लड़कीयों के लिए हमदर्दी नहीं पैदा करता तो आज उन लोगों की लावारिस नाशों की हैसियत से तदफ़ीन करदी जाती ।

टी वी चैनलों पर भी अस्मा-ए-और नजमा की दर्दनाक कहानी को इंतिहाई मुतास्सिर कुन अंदाज़ में पेश किया गया था । इन दोनों को इंतिहाई बुरी हालत में 108 अम्बो लिनस में डाले उस्मानिया दवाख़ाना मुंतक़िल किया जा रहा था । इस मंज़र को देख कर कई पत्थर दिल इंसान भी रो पड़े थे । उन लड़कीयों का अलमीया ये था कि माँ एक भाई की पैदाइश के साथ ही इंतिक़ाल कर गईं थी जब कि बाप अनवर मियां हमेशा शराब में धुत रहा करता ।

उसे अपनी दो बेटीयों और 3 बेटों से कोई सरोकार ही नहीं था । अस्मा-ए-और नजमा कीवालिदा ज़चगी के बाद फ़ौत होगईं और ज़ालिम शौहर ने नोमोलूद को 5000 रुपय मैं फ़रोख़त करदिया । ये लड़कीयां एक तो माँ के इंतिक़ाल से परेशान थीं दूसरे बाप की शराबनोशी ने उन की ज़िंदगीयों का सुकून बर्बाद कर के रख दिया था । बड़ा भाई आरिफ़ ने अपनी बहनों पर तवज्जा देने की बजाय शादी के साथ ही अपनी बीवी के हमराह घर छोड़ने में ही आफ़ियत समझी जब कि एक और भाई आबिद घर के हालात से तंग आकर घर से भाग निकला इस तरह इस ने भी अपनी ज़िम्मेदारीयों से फ़रार इख़तियार की । ग़रज़अस्मा-ए-और नजमा को हर सतह पर महरूमी का सामना करना पड़ा ।

दवाख़ाना उस्मानिया में शरीक किए जाने के बाद कस्तूरबा गांधी आश्रम लंगर हौज़ ने इन बेसहारा लड़कीयों को हासिल कर लिया और गुज़शता साढे़ चार साल से ये बदनसीब लड़कीयां हिन्दू आश्रम में ज़िंदगीयां गुज़ार रही हैं । लेकिन इस आश्रम के इंतिज़ामीया और सर्वर नगर कीपसमांदा बस्ती भगत सिंह नगर के हिन्दू मुस्लिम हज़रात के साथ साथ मस्जिद फ़क़ीरमुहम्मद की कमेटी काबिल-ए-सिताइश-ओ-मुबारकबाद हैं कि हरवक़त इन लड़कीयों पर ख़ुसूसी तवज्जा दी है । 24 साला अस्मा-ए-और 22 साला नजमा अब बिलकुल सेहत मंदऔर ख़ुश हैं ।

अस्मा-ए-ज़हनी तौर पर कमज़ोर है जब कि नजमा नॉर्मल बताई जाती है । नजमा को आश्रम में डिज़ाइनिंग और मोमबत्ती जैसी घरेलू अशीया बनाने की तर्बीयत दी जा रही है । अब मसला ये है कि ये लड़कीयां अपने घर जाना चाहती हैं और मुहल्ला भगत सिंह नगर के हिन्दुओ और मस्जिद फ़क़ीर मुहम्मद कमेटी के सदर-ओ-शेख़ यूसुफ़-ओ-दीगर अरकान भी इन लड़कीयों को अपने मुहल्ला में वापिस ले जाना चाहते हैं लेकिन आश्रम का कहना है कि पहले लड़कीयों के रहने और उन की निगहदाशत का मुनासिबइंतिज़ाम किया जाय तब ही लड़कीयों को दिया जाएगा ।

दूसरी बात ये है कि कस्तूरबा गांधी आश्रम में बुला लिहाज़ मज़हब-ओ-मिल्लत परेशानी का शिकार लावारिस ज़हनी तौर पर माज़ूर , ज़नाबिलजबर का शिकार बे आसरा लड़कीयों नाफ़रमान-ओ-बदबख़्त औलाद के हाथों सताई हुई माॶं को रखा जाता है और वहां उन के साथ ग़ैरमामूली बेहतर सुलूककिया जाता है । जब कि लड़कीयों की शादियां भी करदी जाती हैं और ये नहीं देखा जाता है कि किस मज़हब के लड़के से शादी की जा रही है ।

चूँकि ये लड़कीयां सेहत मंद होचुकी हैं अगर उन को वहां से नहीं ले जाया गया तो ख़दशा है कि इन मुस्लिम लड़कीयों की शादियां हिन्दू लड़कों या दीगर मज़ाहिब के लड़कों से करदी जाएंगी । ऐसे में मस्जिद फ़क़ीरमुहम्मद की कमेटी के सदर शेख़ यूसुफ़ और दीगर अरकान आगे बढ़ कर उन लड़कीयों को उन के घर में आबाद करने की कोशिशों में मसरूफ़ हैं । अज़ीज़ पाशाह साबिक़ एम पी ने इन ग़रीब लड़कीयों को 60 गज़ का प्लाट दिलवाया था । अराज़ी के हुसूल में जमईता अलालमा-ए-ने भी मदद की थी । मस्जिद कमेटी फ़क़ीर मुहम्मद ने इस अराज़ी पर एक ढांचा खड़ा करदिया है लेकिन तामीर के लिए रक़म दरकार है और वो इसी रक़म केइंतिज़ाम में जुटी हुई है ।

मस्जिद कमेटी के सदर और दीगर अरकान वक़्त बरवक़्त आश्रम पहोनचकर अस्मा-ए-और नजमा की ख़ैर ख़ैरीयत दरयाफ़त करते रहते हैं और हमेशा लड़कीयों को तीक़न देते हैं कि बहुत जल्द आप लोगों को आप के घर ले जाया जाएगा । जब कि अस्मा-ए-और नजमा भी अपने घर और अपने मुहल्ला वापिस होने के लिए बेचैन हैं । बताया जाता है कि इन लड़कीयों का बाप हाल ही में मर चुका है जब कि बाअज़ कहते हैं कि लापता है जब कि बड़े भाई आरिफ़ का पता नहीं । छोटा भाई आबिद ने जो एक मेवाकी दुकान में मुलाज़िम है कभी आश्रम पहोनचकर अपनी बहनों की ख़ैर ख़ैरीयत दरयाफ़तकरने की ज़ख़मत तक गवारा ना की । राक़िम उल-हरूफ़ ने कल आश्रम पहोनचकर इन लड़कीयों से मुलाक़ात की ।

अस्मा-ए-और नजमा ने यही सवाल किया कि उन्हें घर कब ले जाया जाएगा । नजमा ने बताया कि ईद के बाद दोनों को उन के घर वापिस भेज दिया जाएगा वो अपने घर में रहना चाहती हैं । इन लड़कीयों ने बताया कि आश्रम में उन्हें कोई परेशानी नहीं है लेकिन अपने घर की याद सताती है । इस लिए वो घर वापिस होने कीख़ाहां है । हम ने आश्रम के मैनेजर सरीनवास से भी बात की । उन्हों ने बताया किफ़िलवक़्त आश्रम में 125 बेसहारा लड़कीयां और ख़वातीन हैं जिन में से चार लड़कीयां मुस्लिम हैं । दो तो अस्मा-ए-और नजमा है जब कि एक लड़की बैंगलौर से और दूसरी शमस आबाद से ताल्लुक़ रखती है । इन चार में से दो ज़हनी तौर पर माज़ूर या कमज़ोर हैं ।

इस आश्रम में रहने वाली लड़कीयों की निगहदाशत और सेहत का ख़ास ख़्याल रखा जाता है । उन्हें ईलाज-ओ-मुआलिजा की सहूलत भी फ़राहम की गई है । आश्रम के माहानाअख़राजात 1.15 लाख रुपय हैं जो ग़ैर मुस्लिम भाईयों के तआवुन और सरकारी इमदाद से पूरे किए जाते हैं । यहां बुला लिहाज़ मज़हब-ओ-मिल्लत बेसहारा लड़कीयों-ओ-ख़वातीन की ख़िदमत की जाती है । क़ारईन अब मिल्लत की ज़िम्मेदारी है कि इन मजबूर-ओ-बेबस और बेसहारा दुख़तर इन मिल्लत की ज़िंदगीयों में दुबारा ख़ुशीयां लाने के लिए ठोस इक़दामात करें ।

क्यों कि हमारे प्यारे नबी ई का इरशाद मुबारक है अल्लाह ताला उस शख़्स पर रहम नहीं करता जो दूसरों पर रहम नहीं करता । इन बहनों के बारे में दीगर तफ़सीलात मस्जिद फ़क़ीर मुहम्मद , भगत सिंह नगर सुरूर नगर की इंतिज़ामी कमेटी के सदर शेख़ यूसुफ़ से फ़ोन नंबर 9848930760 से हासिल की जा सकती हैं ।

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