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हिमायत बेग को सज़ा-ए‍‍‍-मौत से राहत मिली

पुणे जर्मन बेकरी मामले में सबूत की कमी पर मम्बई हाईकोर्ट का फैसला

मुंबई: पुणे जर्मन बेकरी धमाका मामला 2010 में  सज़ा-ए‍‍-मौत की सज़ा पाने वाला हिमायत बेग को आज बड़ी राहत मिली। मुंबई हाईकोर्ट ने इस मामले में  सबूतों के कारण उनकी मौत पर रोक लगा दी। प्रॉसिक्यूशन उनके खिलाफ सबूत पेश करने में नाकाम रहा।

जस्टिस एच एच पाटिल और एस.बी. शियक्रे युक्त एक डिवीज़न बेंच ने धमाके मामले में अपने फैसले का ऐलान‌ करते हुए कहा कि हिमायत बेग के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं। इस ऐलान से राज्य आतंकवाद दस्ते लिए परेशानी हुई है। हालांकि 35 साला हिमायत बेग की सजा और विस्फोटक पदार्थ (आरडीएक्स) रखने के इल्ज़ाम‌ के तहत दी गई उम्रकैद की सजा की रोक‌ दी है।

जांच एजेंसी ने हिमायत बेग के लातूर निवास 1200 किलोग्राम आरडीएक्स बरामद किया था। सितंबर 2010 में उनकी गिरफ्तारी के बाद यह धमाकों का सामान जब्त कर ली गई थी। मुंबई हाईकोर्ट ने कड़े कानून अवैध गतिविधियां निरोधक कानून की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 302 हत्या और 307 हत्या के अलावा अन्य विभिन्न धाराओं के तहत दी गई मौत की सजा को बर्खास्त करते हुए उसे रोक लगा दी।

लेकिन उन्हें अन्य धमाकों का समान‌ रखने के प्रावधानों के तहत सजा उम्रकैद की पुष्टि की। हिमायत बेग जो काला शर्ट और नीली जींस पेंट पहने अदालत में जज के फैसले के वक़्त‌ मौजूद थे अदालत ने कहा कि हिमायत बेग ने अपनी गिरफ्तारी के बाद से आज की तारीख तक जेल में बिताए हैं।

इस मीयाद को सजा के रूप में माना जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में दो गवाहों की तरफ से दाखिल किए गए मांग पर कोई आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इन इल्ज़ामों से बेग को बरी कर दिया गया है। जब हिमायत बेग ने अपनी मौत की सजा को चुनौती जबकि हाईकोर्ट में अपील दायर की थी इस मामले के दो गवाहों ने भी याचिका दाखिल करके मांग की थी कि उनके बयान को फिर सबूत के रूप में दर्ज हो लेकिन जज  ने याचिका पर फैसला देने जरूरी करार नहीं दिया। हिमायत बेग को आतंकवाद विरोधी दस्ते ने सितंबर 2010 में इंडियन मुजाहिद्दीन ग्रुप‌ के आतंकवादी के रूप में गिरफ्तार किया था।

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