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हिम्मत-ए-मर्दा तो मदद- ए -खुदा; खुद की बनाई कार में किया 3000 किलोमीटर का सफर।

“मैं 15 साल का था जब मैंने अपने परिवार का पेट भरने  के लिए कमाना शुरू कर दिया था, लेकिन कुछ अलग करने की तमन्ना और जोश हमेशा दिल में था। फिर जब 2002 में मैं 50 साल का हुआ तो मैंने खुद से कहा कि इस से पहले की मैं और बूढा हो जाऊं मुझे कुछ करना ही होगा ; कुछ जो अलग और उम्दा हो और दुनिया के काम आ सके।” यह शब्द 63 साल के सईद सज्जन अहमद के हैं जो अपनी खुद की बनाई सोलर कार से 3000 किलोमीटर का सफर तय कर IIT दिल्ली के पहले इंडिया इंटरनेशनल साइंस मेले में हिस्सा लेने आये हुए थे । अहमद ने 3000 किलोमीटर का यह फासला 30 दिन में तय किया है।उनकी पढाई और काम के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि उन्होंने 12 वीं क्लास में पढाई छोड़ दी थी क्यूंकि उनके परिवार को घर चलाने वाला कोई चाहिए था पहले उन्होंने फलों की दुकान चलाई और बाद में अपने शौक़ के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर का काम सीख कर दूकान खोली।

अहमद को अपने काम के लिए कर्नाटक सरकार से 2006 में अवार्ड भी मिल चुका है। अहमद की कार में 100 watt के 5 सोलर पैनल लगे हैं और 6 बैटरियां लगी हैं जो सूरज से मिलने वाली ऊर्जा को जमा रखती हैं। अहमद ने बताय की चार बनाने में उन्हें करीबन एक लाख रुपये की जरुरत पड़ी। अभी तक अहमद अपनी कार से 40000 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं।  अहमद का कहना है कि डाक्टर APJ अब्दुल कलाम उनके लिए प्रेरणा का साधन रहे हैं उनसे मिली प्रेरणा से ही वह आज यह सब कर पाये हैं ।

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