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हीरोइन की उम्र बहुत मुख़्तसर होती है : आशा पारेख

अपने वक़्त की कामयाब और ख़ुसूसी तौर पर मरहूम फिल्मों की मुस्तक़िल हीरोइन कहलाई जाने वाली आशा पारेख यूं तो ज़िन्दगी की 75 बहारें देख चुकी हैं और आज भी फ़िल्मी पार्टीयों में कभी कभी नज़र आजाती हैं। फ़िल्म फ़ाइंडिंग फ़ेनी की ख़ुसूसी स्क्री

अपने वक़्त की कामयाब और ख़ुसूसी तौर पर मरहूम फिल्मों की मुस्तक़िल हीरोइन कहलाई जाने वाली आशा पारेख यूं तो ज़िन्दगी की 75 बहारें देख चुकी हैं और आज भी फ़िल्मी पार्टीयों में कभी कभी नज़र आजाती हैं। फ़िल्म फ़ाइंडिंग फ़ेनी की ख़ुसूसी स्क्रीनिंग के मौक़े पर जब उन से मुलाक़ात हुई तो वो फ़िल्म के तमाम अदाकारों से फ़र्दन फ़र्दन मुलाक़ात करते हुए उन्हें मुबारकबाद दे रही थीं।

आशा पारेख एक एसी अदाकारा हैं जिन्हें बुढ़ापा भी मात नहीं दे सका। वो आज भी दिलकश नज़र आती हैं जिस तरह उनकी सब से अज़ीज़ सहेली वहीदा रहमान ने ख़ुद को मेंटेन किया है। आशा पारेख ने अपने कररियर‌ के दौरान कभी भी दिलीप कुमार और राज कपूर के साथ काम नहीं किया जिस का उन्हें हमेशा मलाल रहा।

अपने वक़्त के हर हीरो के साथ उन्होंने कामयाब जोड़ी बनाई है जिन में राजिंदर कुमार, सुनील दत्त, जतिंद्र, धर्मेन्द्र, राजेश खन्ना, फ़िरोज़ ख़ान, शम्मी कपूर, शशी कपूर, देवानंद, बसव अजीत, नवीन निश्चल, मनोज कुमार और जवाए मुख‌र्जी के नाम काबिल-ए-ज़िकर हैं। आशा पारेख ने फ़िल्म कालिया में अमिताभ बच्चन के साथ कैरक्टर रोल निभाया था।

उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी फिल्मों के ऑफर्स आते हैं लेकिन उन का रोल इतना मुख़्तसर या ग़ैर दिलकश होता है कि वो इनकार करदेती हैं। उन्होंने एतराफ़ किया कि फ़िल्मी दुनिया में हीरोइन की ज़िन्दगी बहुत मुख़्तसर होती है लेकिन इस के बावजूद उन्होंने एक तवील इन्निंग खेली जिस के लिए वो मरहूम नासिर हुसैन की हमेशा शुक्र गुज़ार रहेंगी। उन्होंने वादा किया कि अगर कोई अच्छा रोल उन्हें पेश किया गया तो वो एक बार फिर बड़े पर्दे पर नज़र आयेंगी।

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