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हुकूमत की बे-हिसी पर क़ानून भी रो पड़ा

हैदराबाद 25 अप्रैल: अदालतों में सुबह के वक़्त-ए-शाम में और तातीलात में भी काम करने की ज़रूरत है ताकि आम आदमी को ज़ेर इलतिवा मुक़द्दमात की बरसर मौक़ा यकसूई के ज़रीये तेज़ी से इन्साफ़ फ़राहम किया जाये।

तेलंगाना के वज़ीर-ए-क़ानून ए इंदिरा किरण रेड्डी ने इस ख़्याल का इज़हार किया और कहा कि कमर्शियल अदालतें भी क़ायम की जानी चाहिऐं। इंदिरा किरण रेड्डी ने तमाम चीफ़ मिनिस़्टरों और हाइकोर्टस के चीफ़ जस्टिसों की क़ौमी कांफ्रेंस में तेलंगाना की नुमाइंदगी करते हुए कहा कि ज़रूरत इस बात की है कि आम आदमी की मदद करने के मक़सद से मुक़द्दमात की तेज़ी के साथ यकसूई की जानी चाहीए और इस के लिए बेहतर मेकानिज़म होना चाहीए।

इस से इन्साफ़ रसानी का अमल तेज़-रफ़्तार हो सकता है। इस कांफ्रेंस से वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने भी ख़िताब किया जबकि चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया जस्टिस टीएस ठाकुर ने अदलिया पर काम के बोझ को वाज़िह किया था। चीफ़ जस्टिस इस कांफ्रेंस में शिद्दत-ए-जज़्बात से रो पड़ा।

इंदिरा किरण रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना हुकूमत चाहती है कि अदालती निज़ाम और कोर्टस का बेहतर इस्तेमाल किया जाये ताकि आम आदमी को मुक़द्दमात की तादाद में मुसलसिल इज़ाफे से नजात दिलाई जा सके। उन्होंने कहा कि चीफ़ मिनिस्टर चन्द्र शेखर राव‌ इस सिलसिले में काम करना चाहते हैं और ज़िला-ओ-टाउनस में अदालतों की तादाद में इज़ाफ़ा चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि हुकूमत अदालतों के लिए अराज़ी बुनियादी सहूलतें और इंफ्रास्ट्रक्चर फ़राहम करने की हामी है। चीफ़ मिनिस्टर ने हाल में लोक अदालतों के मुतवाज़ी निज़ाम अदलिया पर भी ज़ोर दिया था ताकि मुक़द्दमात की तेज़ी से यकसूई हो सके।

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