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हुकूमत के ज़ेर-ए-क़ब्ज़ा वक़्फ़ जायदादों के तख़लिया या किराए की अदायगी की पारलीमानी कमेटी की जानिब से सिफ़ारिश

नई दिल्ली १७ दिसम्बर (पी टी आई) एक पारलीमानी कमेटी ने सिफ़ारिश की कि हुकूमत के ज़ेर-ए-क़ब्ज़ा या इस के महिकमों के ज़ेर-ए-क़ब्ज़ा वक़्फ़ आराज़ीयात का अंदरून छः माह तख़लिया करदिया जाये, या बाज़ार में मुरव्वज किराए की शरह पर मुताल्लिक़ा व

नई दिल्ली १७ दिसम्बर (पी टी आई) एक पारलीमानी कमेटी ने सिफ़ारिश की कि हुकूमत के ज़ेर-ए-क़ब्ज़ा या इस के महिकमों के ज़ेर-ए-क़ब्ज़ा वक़्फ़ आराज़ीयात का अंदरून छः माह तख़लिया करदिया जाये, या बाज़ार में मुरव्वज किराए की शरह पर मुताल्लिक़ा वक़्फ़ बोर्डस को किराया अदा किया जाये।

राज्य सभा की सेलेक्ट कमेटी ने जिस ने वक़्फ़ (तरमीमी) क़ानून 2010-ए-का जायज़ा लिया, सिफ़ारिश की कि अगर वक़्फ़ जायदाद तिजारती मक़ासिद के लिए इस्तिमाल की जा रही हो तो लीज़ पंद्रह साल मुद्दत की होनी चाहीये। सेहत और तालीमात के इदारों के लिए लीज़ की मुद्दत 30 साल होनी चाहीये।

ये रिपोर्ट आज राज्य सभा में पेश की गई। कमेटी के सरबराह कांग्रेस के रुकन सैफ उद्दीन सोज़ थे। उन्हों ने कहा कि हुकूमत या इस के महिकमों को अपने ज़ेर-ए-क़ब्ज़ा आराज़ीयात और जायदादें अंदरून छः माह तख़लिया कर देनी चाहीए या फिर बाज़ार में मुरव्वज किराया की शरह पर मुताल्लिक़ा वक़्फ़ बोर्डस को जायदाद पर क़बज़ा की तारीख़ से असतक़दामी असर के साथ किराया अदा करना चाहीये।

रिपोर्ट की सिफ़ारिशात उस वक़्त की वज़ीर-ए-आज़म आँजहानी इंदिरा गांधी को इस सिलसिले में अप्रैल 1975-ए-में रवाना करदा मकतूब की बुनियाद पर की गई हैं। कमेटी ने इस्तिलाह गै़रक़ानूनी क़बज़ा गीर को तौसीअ देते हुए इस में किसी भी शख़्स या इदारा सरकारी हो या ख़ानगी को शामिल करने की सिफ़ारिश की, ताकि किसी भी सरकारी या ख़ानगी इदारा की जानिब से गै़रक़ानूनी क़बज़ा के इमकान का इंसिदाद हो सके।

इलावा अज़ीं हिबा की हुई या वक़्फ़ बोर्डस की वक़्फ़ जायदाद के इलावा कमेटी ने फ़ैसला किया कि वक़्फ़ जायदाद को रहन रखने के इख़्तयारात भी सल्ब कर लिए जाएं।

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