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हुज़ूर निज़ाम का 1940 में अमीरों की फ़ेहरिस्त में पहला मुक़ाम

हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ांन बहादुर को आज भी दुनिया याद करती है । बेपनाह दौलत का हामिल होने के बावजूद उन की सादगी और रियाया पर्वरी को मिसाली क़रार दिया जाता है। अगर्चे फ़िर्क़ापरस्तों ने इस अज़ीम शख्सियत को फ़रामोश करव

हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ांन बहादुर को आज भी दुनिया याद करती है । बेपनाह दौलत का हामिल होने के बावजूद उन की सादगी और रियाया पर्वरी को मिसाली क़रार दिया जाता है। अगर्चे फ़िर्क़ापरस्तों ने इस अज़ीम शख्सियत को फ़रामोश करवाने में कोई कसर बाक़ी नहीं रखी लेकिन कैप्टन पांडव रंगा रेड्डी जैसे सैंकड़ों सेक्युलर ज़हन लोग अब भी मौजूद हैं जो हुज़ूर निज़ाम को याद करते हैं ।

आप को बतादें कि हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ांन बहादुर को 1940 में दुनिया के सब से अमीर तरीन शख़्स का एज़ाज़ हासिल था । उस वक़्त उन की दौलत दो बिलियन डॉलर्स से कहीं ज़्यादा थी आज के दौर में उस वक़्त के दो बिलियन डॉलर्स दो हज़ार बिलियन डॉलर्स से भी ज़्यादा होते हैं ।

22 फरवरी 1937 को अमरीकी टाईम्स मैगज़ीन के सरे वर्क़ पर हुज़ूर निज़ाम की तस्वीर शाय की गई थी जिस पर लिखा था दुनिया की मुतमव्विल तरीन शख्सियत निज़ाम दक्कन , हुज़ूर निज़ाम की रियाया पर्वरी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1950 में हकूमते हिन्द ने तेलंगाना के सालाना ख़ज़ाना की वसूलियात को एक बिलियन डॉलर्स बताया था जब कि वो रियाया से महसूल वसूल करने में हमदर्दी का मुज़ाहरा करते थे ।

हुज़ूर निज़ाम नवाब मीर उसमान अली ख़ांन बहादुर का अपनी वफ़ात तक भी दुनिया के चुनिंदा अमीर तरीन लोगों में शुमार होता था जब कि मौजूदा मआशी पस मंज़र में तारीख उन्हें दुनिया का पांचवां सदा बहार अमीर तरीन शख़्स मानती है । उन्हें अब भी दुनिया का दूसरा अमीर तरीन बादशाह माना जाता है।

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