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हुस्न अमल और तक़वा की एहमीयत

हज़रत अब्बूबकर रज़ी अल्लाहु तआला अनहु से रिवायत हैके एक शख़्स ने रसूल(स०अ०व०) से पूछा या रसूल अल्लाह!(स०अ०व०) कौनसा आदमी बेहतर है?।

हज़रत अब्बूबकर रज़ी अल्लाहु तआला अनहु से रिवायत हैके एक शख़्स ने रसूल(स०अ०व०) से पूछा या रसूल अल्लाह!(स०अ०व०) कौनसा आदमी बेहतर है?।

हुज़ूर(स०अ०व०) ने फ़रमाया वो शख़्स जिस की उम्र ज़्यादा हो और अमल अच्छे हूँ। फिर उस शख़्स ने पूछा और कौनसा आदमी बुरा है?।

रसूल(स०अ०व०) ने फ़रमाया वो शख़्स जिस की उम्र ज़्यादा हो और बुरे अमल हूँ। (अहमद, तिरमिज़ी, दारमी)
मज़कूरा हदीस शरीफ़ से ये वाज़िह होता हैके मज़कूरा हुक्म अग़्लब के एतबार से है, यानी अच्छे या बुरे अमल ज़्यादा होंगे तो वो शख़्स अच्छा या बुरा क़रार पाएगा और अगर अच्छे और बुरे अमल दोनों बराबर होंगे तो फिर वो एक वजह से तो अच्छा कहलाएगा और एक वजह से बुरा, अगरचे इस बात का साबित होना नादिर है।

हज़रत साद रज़ी अल्लाहु तआला अनहु से रिवायत हैके रसूल क्रीम (स०अ०व०) ने फ़रमाया यक़ीनन अल्लाह ताआला उस बंदे को बहुत पसंद फ़रमाता है, जो मुत्तक़ी-ओ-ग़नी और गोशा नशीन हो। (मुस्लिम)

वाज़िह रहे कि मुत्तक़ी उस शख़्स को कहते हैं जो ममनू चीज़ों से इजतिनाब करे, या यहां मुत्तक़ी से मुराद वो शख़्स है जो अपने माल-ओ-ज़र को बुरे कामों और एश-ओ-तफ़रीह में ख़र्च ना करे।

बाअज़ हज़रात का कहना हैके मुत्तक़ी से मुराद वो शख़्स है, जो हराम और मुश्तबा उमूर से एहतियात करे और इन चीज़ों से भी एहतियात-ओ-परहेज़ करे, जिन का ताल्लुक़ ख़ाहिशात नफ़स और मुबाहात से है।

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