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हेट स्पीच पर आजम खान के खिलाफ क्यों नहीं दर्ज हो FIR: हाईकोर्ट

सूबे के काबीना वज़ीर आजम खान की तरफ से अपने ही मजहब के एक दूसरे तब्के व इसके मौलानाओं के खिलाफ जारी प्रेस स्टेटमेंट को हाईकोर्ट को लखनऊ बेंच ने पहली नज़र में हेट स्पीच यानी नफरत फैलानेवाली बयानबाजी करार दिया है|बेंच ने इस मसले पर रि

सूबे के काबीना वज़ीर आजम खान की तरफ से अपने ही मजहब के एक दूसरे तब्के व इसके मौलानाओं के खिलाफ जारी प्रेस स्टेटमेंट को हाईकोर्ट को लखनऊ बेंच ने पहली नज़र में हेट स्पीच यानी नफरत फैलानेवाली बयानबाजी करार दिया है|बेंच ने इस मसले पर रियासत की हुकूमत से सवाल जवाब किया है|

हुकूमत से पूछा है कि क्या किसी काबीना के वज़ीर को प्रेस स्टेटमेंट के जरिए किसी फिर्के के खिलाफ हेट स्पीच देने का इख्तेयार है|अगर ऐसा नहीं है, तो क्या इस बाबत आजम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने व मुकदमा चलाने का हुक्म नहीं देना चाहिए| मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी|

जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस अरविंद कुमार त्रिपाठी की बेंच ने यह हुक्म एक मस्जिद के इमाम राजा हुसैन व दिगर की दरखास्त पर दिया है|दरखास्त में आजम खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने व उन्हें काबीना के वज़ीर के ओहदा से बर्खास्त करने की भी मांग की गई है|

दरखास्त पर बहस करते हुए वकील अशोक पांडेय का कहना था कि वज़ीर रहते हुए आजम ने अपने पैड पर खुद के दस्तखत व मोहर से प्रेस रिलीज जारी किया. जिसे पढ़ने से साफ जाहिर है कि उन्होंने अपने ही मजहब के दूसरे तब्के के खिलाफ एक ऐसा बयान दिया है, जो हेट स्पीच के जुमरे में आता है| लिहाजा आजम के खिलाफ फौरन कार्रवाई की जाए|

दरखास्त के साथ दाखिल प्रेस रिलीज की कापियां देखने के बाद बेंच का कहना था कि यह खुद काबीना के वज़ीर ने जारी किया है|इसे देखने से पहले नज़र मे यह हेट स्पीच मालूम होता है|उधर, बेंच के हुक्म पर सरकार की तरफ से जवाब दाखिल कर दिया गया है|जिस पर बेंच ने अब दरखास्तगुजारों से अपना हलफनामा दाखिल करने को कहा है|

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