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हैदराबादी रुबात में आज़मीने हज्ज के क़ियाम की राह हमवार

मक्का मुकर्रमा में हैदराबादी रुबात में क़ियाम से मुताल्लिक़ तनाज़ा की अदम यकसूई को देखते हुए कौंसिल जनरल हिंद बराए जेद्दाह ने नाज़िर रुबात को आंध्र प्रदेश के आज़मीने हज्ज की क़ुरआ अंदाज़ी का इख़तियार दिया है ताकि उन्हें रुबात में क़ि

मक्का मुकर्रमा में हैदराबादी रुबात में क़ियाम से मुताल्लिक़ तनाज़ा की अदम यकसूई को देखते हुए कौंसिल जनरल हिंद बराए जेद्दाह ने नाज़िर रुबात को आंध्र प्रदेश के आज़मीने हज्ज की क़ुरआ अंदाज़ी का इख़तियार दिया है ताकि उन्हें रुबात में क़ियाम की सहूलत फ़राहम होसके।

कौंसिल जनरल जेद्दाह फ़ैज़ अहमद क़दवाई ने अप्रैल को सेंट्रल हज कमेटी को मकतूब रवाना करके ख़ाहिश की के नाज़िर रुबात की तरफ से रुबात में क़ियाम के मुस्तहिक़ अफ़राद के क़ुरआ अंदाज़ी से चुनाव के बाद हज कमेटी इन्हें क़ियाम से मुताल्लिक़ मकतूब जारी करे। कौंसिल जनरल ने कहा कि तनाज़ा की अदम यकसूई के बाइस आज़मीन को दुशवारीयों का सामना है जबकि इस में आज़मीन का कोई क़सूर नहीं।

उन्होंने मकतूब की नक़ल आंध्र प्रदेश हज कमेटी और एच ई एच् दी निज़ाम औक़ाफ़ कमेटी को भी रवाना की है। कहा गया हैके 19 फ़बव‌री 2014 को उन्होंने तनाज़ा की यकसूई के लिए मकतूब रवाना किया था।

सेक्रेटरी औक़ाफ़ कमेटी हैदराबाद ने 25 फ़बव‌री को जवाबी रवाना करके इस मुआमले को कमेटी के मीटिंग में पेश करने की इत्तॆला दी ताहम इस के बाद से कोई इत्ततेला नहीं दी गई।

कौंसिल जनरल ने कहा कि इस तनाज़ा के सबब गुज़श्ता साल रियासत के आज़मीन रुबात में क़ियाम से महरूम रहे। जारीया साल भी ताहाल तनाज़ा की अदम यकसूई से आज़मीन रुबात में क़ियाम के हक़ से महरूम होसकते हैं।

उन्होंने कहा कि सेंट्रल हज कमेटी ने रुबात में क़ियाम से मुताल्लिक़ मकतूब के इदख़ाल की आख़िरी तारीख़ 10 जून मुक़र्रर की है लिहाज़ा औक़ाफ़ कमेटी और नाज़िर रुबात के दरमयान 10 मई तक इस मुआमले की यकसूई ज़रूरी है।

चूँकि इस मुद्दत के लिए एक माह बाक़ी रह गया है लिहाज़ा कौंसिल जनरल ने सिफ़ारिश की के नाज़िर रुबात हुसैन शरीफ़ को आज़मीने हज्ज के इंतिख़ाब का इख़तियार दिया जाये क्युंकि क़ुरआ अंदाज़ी का तरीका-ए-कार शफ़्फ़ाफ़ है।

उन्होंने सेंट्रल हज कमेटी से सिफ़ारिश की के वो मुंख़बा आज़मीन को क़ियाम से मुताल्लिक़ मकतूब जारी करे। कौंसिल जनरल का ख़्याल हैके इस तनाज़ा से जारीया साल भी आज़मीन रुबात में क़ियाम के हक़ से महरूम ना हविपाएं। फ़ैज़ अहमद क़दवाई की तजवीज़ को अगर सेंट्रल हज कमेटी क़बूल करती है तो जारीया साल रियासती आज़मीन को रुबात में क़ियाम का मौक़ा फ़राहम होगा और रक़म की बचत होगी।

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