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हैदराबादी ख़ातून सुरय्या तैयब जी जिन्हों ने क़ौमी पर्चम का डिज़ाइन तैयार किया

हिंदुस्तान में ज़िंदगी के हर शोबा में मुसलमानों कारहाए नुमायां अंजाम दीए और बिला लिहाज़ मज़हबो मिल्लत अवाम की ख़िदमात अंजाम देने में कोई कसर बाक़ी नहीं रखी। जद्दो जहद आज़ादी में सब से ज़्यादा अपनी जानों के नज़राने पेश किए। इन्क़िलाब ज़िं

हिंदुस्तान में ज़िंदगी के हर शोबा में मुसलमानों कारहाए नुमायां अंजाम दीए और बिला लिहाज़ मज़हबो मिल्लत अवाम की ख़िदमात अंजाम देने में कोई कसर बाक़ी नहीं रखी। जद्दो जहद आज़ादी में सब से ज़्यादा अपनी जानों के नज़राने पेश किए। इन्क़िलाब ज़िंदाबाद जैसे जानदार नारा बुलंद करते हुए अंग्रेज़ों पर हैबत तारी करदी , उर्दू अख़्बारात के ज़रीए अवाम में आज़ादी का जज़बा पैदा किया। जद्दो जहद आज़ादी में देखने वालों ने एक ऐसा दर्दनाक मंज़र भी देखा जिस की तारीख किसी मुल्क की जद्दो जहद आज़ादी में नहीं मिल सकती।

हिंदुस्तान में मुग़ल सलतनत के आख़िरी ताजदार बहादुर शाह ज़फ़र के दो फ़रज़न्दों के सर क़लम करते हुए एक सजी सजाई मुश्क़ाब में रख कर ज़ईफ़ बाशाह को पेश की गई और इस तश्त पर रखे कीमती कपड़े को बहादुर शाह ज़फ़र ने उठाया तो अपने जवान शहज़ादों के कटे सर देख कर उन का कलेजा दहल कर रह गया।

लेकिन इस मजबूर और बेबस मुजाहिद आज़ादी ने बारगाहे रब्बुल इज्ज़त में शुक्र बजा लाया कि इस के जवाँ बेटे मुल्क पर क़ुर्बान हो गए। ऐसा मंज़र हिंदुस्तान में किसी मुजाहिद आज़ादी किसी सियासतदां ने नहीं देखा होगा।

इसी तरह जद्दो जहद आज़ादी में लाखों उल्मा को तख़्तदार पर चढ़ाया गया। मुसलमानों की इस क़दर कुर्बानियों के बावजूद उन्हें फ़रामोश कर दिया गया उन के कारनामों को फ़िर्कापरस्ती जानिबदारी, तास्सुब और शरपसंदी की एक दबीज़ चादर तले छुपा दिया गया। इस तरह फ़िर्क़ा परस्तों ने एक तरह से मुसलमानों के कारनामों को दफ़न कर दिया। क़ारईन! मुसलमानों के कारनामों को छिपाने की कोशिशों के बावजूद मुल्क के चंद सेक्यूलर अनासिर वक़्फ़ा वक़्फ़ासे अपनी खोज और तहक़ीक़ के ज़रीए फ़िर्कापरस्त ताक़तों को शर्मिंदा करते रहते हैं। इस सिलसिले में कैप्टन पांडव रंगा रेड्डी का नाम बड़े फ़ख़र से लिया जा सकता है।

उन्हों ने हाल ही में एक ऐसा इन्किशाफ़ किया कि इस से फ़िर्क़ा परस्तों में हलचल पैदा हो जाएगी। आज अगर किसी से सवाल किया जाता है कि क़ौमी पर्चम किस ने डिज़ाइन किया है तो इस का यही जवाब दिया जाता है कि मछली पट्नम आंध्र प्रदेश से ताल्लुक़ रखने वाले पिंगली वेंकैया ने क़ौमी पर्चम का डिज़ाइन तैयार किया है।

ये जवाब तारीख की किताबों इंटरनेट पर दस्तयाब मवाद बाशमोल विकीपीडिया के मुताबिक़ बिलकुल सहीह है लेकिन हक़ीक़त में देखा जाए तो ये जवाब बिलकुल ग़लत और हक़ीक़त को पोशीदा रखने की एक शर्मनाक कोशिश है।

आज आप जो क़ौमी पर्चम यह तिरंगा देख रहे हैं इस का डिज़ाइन हैदराबाद से ताल्लुक़ रखने वाली एक ख़ातून सुरय्या तैयब जी ने तैयार किया था और इसी ख़ातून को क़ौमी तिरंगे में अशोक चकरा शामिल करने का भी एज़ाज़ हासिल है।

आप को बतादें कि 22 जुलाई 1947 को क़ौमी क़ानूनसाज़ असेंबली के इजलास में सुरय्या तैयब जी के डिज़ाइन कर्दा क़ौमी पर्चम को तालियों की गूंज में अपनाया गया। चूँकि इस पर्चम के डिज़ाइन में एक ख़ातून का अहम रोल रहा।

इस लिए क़ानून साज़ असेंबली में मुहतरमा हन्सा मेहता ने सारी हिंदुस्तानी ख़्वातीन की जानिब से पेश किए क़ौमी पर्चम की पेशकशी कमेटी तक़रीबन 74 ख़्वातीन पर मुश्तमिल थी जिन में सरोजनी नायडू , क़ुदसिया अज़ीज़ रसूल , शरीफा हामिद अली , उस्वा हुसैन ज़रीना करीम भाई , ज़ोरा अंसारी , आईशा अहमद , इंदिरा गांधी , सुरय्या तैयब जी वगैरह शामिल थीं।

इसी तरह सब्ज़ रंग को तरक़्क़ी और ख़ुशहाली की अलामत बताया गया। बहरहाल सुरय्या तैयब जी ने तिरंगा की दरमियानी सफेद पट्टी में चरखे की जगह अशोक चक्र शामिल करते हुए रास्त बाज़ी के क़वानीन की अलामत से हिंदुस्तानियों को वाक़िफ़ करवाया।

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