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हैदराबाद ओरिजनल फिल्मी कहानियों का गढ़ बन गया है : नमन रामचंद्रन

हैदराबाद, 21 जनवरी -(एफ. एम.

हैदराबाद, 21 जनवरी -(एफ. एम. सलीम) -जुनूब एशियाई फिल्मों के नक़्काद और अदीब नमन रामचंद्रन का दावा है कि हिन्दुस्तान में इंडिपेंडेट सिनेमा का दौर फिर से बुलंदी की ओर बढ़ रहा है। चाहे वह बॉलिउड़ हो या दक्षिण की फिल्में, उन फिल्मों में जहाँ `कहानी’ स्टार है, वह फिल्में सूपर स्टार नायक नायिकाओं की फिल्मों से आगे निकल रही है।

बैंग्लूर में पले बढ़े नमन इन दिनों लंदन में रहकर जुनूब एशियाई फिल्मों पर लिख रहे हैं। वेरायटी और साइट एण्ड साउण्ड जैसे मशहूर रिसालों के कॉलमनिगार हैं। अपनी पहली किताब `लाइट्स कैमेरा मसाला’ के बाद दूसरी किताब रजनीकांत ए डेफिनेटिव बायोग्राफी की रस्मे इजरा के लिए हैदराबाद आये हैं। हिन्दी, अंग्रेज़ी, कन्नड़, मलियालम और तमिल ज़ुबानों पर एकसाँ दस्तरस रखने वाले नमन ने अपनी नयी किताब में साउथ के सूपर स्टार रजनीकांत की ह़कीकी ा़जिन्दगी पर रोशनी डालतने हुए कई चौंका देने वाले पहलू सामने रखे हैं।

नमन ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि आम तौर पर इंटरनेट पर जो जानकारी मौजूद है, कई बार उसके सही होने पर सवाल बना रहता है। लगभग 2 बरस की अथक कोशिशों के बाद उन्होंने रजनीकांत की जिन्दगी पर किताब को मुकम्मिल किया है। वे बताते है,`इतने बड़े स्टार के बारे में जब मैंने ह़कीकी बातें तलाशनी शुरू कीं तो मुझे बहुत कम मवाद हासिल हुआ। जो कुछ मिला, उसके सही होने के बारे में तह़क़ीक की तो हालात काफी फिक्रअंगेज़ थे। ज्यादातर मवाद उनके चाहने वालों ने ज़ज़्बात से मग़लूब होकर भी लिखा थी, बल्कि दिल के अरमान पूरे करने के लिए मनघड़त कहानियाँ भी गढ़ी गयी थी। एक व़ाकिये का ा़जिक्र मैं करना चाहूँगा। उनके बारे में ऑनलाइन जानकारी में बताया गया है कि जब उनकी माँ चल बसीं तो, वो पांच बरस के थे, लेकिन उनके बड़े भाई से जो जानकारी मिली, उसमें बताया गया कि वे 9 से 10 साल के थे और उस वक्त क्रिकेट खेलने के श़ौकी थे। मैंने रजनीकांत को बहुत सादा तबियत और शख्सितय का मालिक पाया। हिन्दी सिनेमा में अगर उनकी तरह को ई है तो बस आमिर खान।’

इन्टरनेट से तह़क़ीक की आदत को होने वाले ऩुकसान का जिक्र करते हुए नमन कहते हैं,`इन्टरनेट ज़माने को खोखला बना रहा है। यह टेक्नोलोजी उसी फायदेमंद साबित हो सकती है, जब लोग जानकारी को अपने तौर भी छानबीन करें। सहाफत में पहले छानबीन के जो मेयार थे, वो भी टूटते जा रहे हैं। लोग बिना मेहनत के बटन दबाते ही सबकुछ जान लेने कोशिश में काहिल होते जा रहे हैं।’

नमन रामचंदानी की हिन्दुस्तानी फिल्मों पर गहरी नज़र रही हैं। फिल्मों के हाल और मुस्त़कबिल पर बात करते हुए वे बताते हैं कि हिन्दुस्तानी सिनेमा की अपनी तहज़ीब रही है। हाल के दिनों में बॉलिउड जहाँ हॉलिउड से मुतासिर रहा, वहीं साउथ ने अपनी जड़ें मजबूत कीं। यहाँ से ओरिजनल कहानियों पर बड़ी तादाद में फिल्में बनी और आज हैदराबाद ओरिजनल कहानियों का गढ़ बन गया है, जहाँ से बॉलिउड भी रिमेक करने के लिए मजबूर हो गया है। तमिल और मलियालम में भी ओरिजनल कहानियों का चलन ज्यादा है, जहाँ हीरो नहीं बल्कि कहानी स्टार है। बड़े सितारों की फिल्में टूट रही हैं, तो दूसरी ओर कहानी पर मबनी फिल्में अच्छा बिज़नेस कर रही हैं।

अनुराग कश्यप को इंडिपेंडेंट सिनेमा की तहरीक में अहम रोल अदा करने का जिक्र करते हुए नमन कहते हैं कि उन्होंने न सिर्फ खुद अलग तरह फिल्में बनाई हैं, बल्कि इस तरह का माहौल बनाने के लिए तहरीक का काम किया है। साउथ में तो ऐसी फिल्मों की खूब हौसला अफ़ज़ाई हो रही है, उम्मीद के बॉलिउड भी इस जानिब तवज्जे करेगा।

नमन इन दिनों इंडिपेंडेंट सिनेमा का मुतालेआ कर रहे हैं। उम्मीद के जल्द ही इस मौज़ू पर उनकी नयी किताब पढ़ने को मिलेगी। लेकिन हिन्दुस्तान में किताबें पढ़ने की कम होती आदत पर वे दुःखी हैं। बताते हैं कि मग़रिब में लोग अपने काम पर आते, जाते हुए अपने टैब पर किताबें पढ़ते हुए अदब से जुड़े हैं, लेकिन यहाँ नयी टेक्नोलोजी सिर्फ गाने सुनने और वीडियों देखने तक सीमित होती जा रही है।

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