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हैदराबाद-ओ-आंधरा का इंज़िमाम फ़ाश ग़लती

हैदराबाद ।२६अगस्त: रियासत हैदराबाद और आंधरा इंज़िमाम के मौक़ा पर हुए मुआहिदात और इंतिज़ामात की नाकामी के उनवान से तलंगाना रिसोर्स सैंटर का 32 वांमुज़ाकरा मुनाक़िद हुआ, जिस में प्रोफ़ैसर सिरीधर स्वामी मॶज़फ़ प्रोफ़ैसर आफ़ एजूके

हैदराबाद ।२६अगस्त: रियासत हैदराबाद और आंधरा इंज़िमाम के मौक़ा पर हुए मुआहिदात और इंतिज़ामात की नाकामी के उनवान से तलंगाना रिसोर्स सैंटर का 32 वांमुज़ाकरा मुनाक़िद हुआ, जिस में प्रोफ़ैसर सिरीधर स्वामी मॶज़फ़ प्रोफ़ैसर आफ़ एजूकेशन उस्मानिया यूनीवर्सिटी, प्रोफ़ैसर पी हरी नाथ मोज़फ़ प्रोफ़ैसर पोलीटिक्ल साईंस उस्मानिया यूनीवर्सिटी, टी ववीक ऐडीशनल डायरैक्टर महिकमा कमर्शियल टैक्स ने शिरकत की ।

प्रोफ़ैसर स्वामी ने कहा कि हैदराबाद में जहां पर आसिफ़ जाह साबह की हुक्मरानी थी,मुनज़्ज़म साज़िश के तहत आनधराई हुकमरानों ने आंधरा के इंज़िमाम से तलंगाना अवामके हुक़ूक़ सल्ब किए । उस की मर्कज़ी हुकूमत और मर्कज़ी क़ाइदीन ज़िम्मेदार हैं। उन्हों ने कहा कि फ़िर्कावाराना मुनाफ़िरत के फैलाव‌ , तलगो ज़बान को लाज़िमी क़रार दे कर मुलाज़मीन को नौकरीयों से बरतरफ़ करदेना जैसे संगीन मसाइल के आग़ाज़ के साथ आनधराई हुकमरानों का तलंगाना में दाख़िला तलंगाना अवाम के मसाइल की शुरूआत है।

उन्हों ने कहा कि हैदराबाद में इंज़िमाम से क़बल आनधराई ताजिरों की हैदराबाद में इजारादारीयों के ख़िलाफ़ इडली सानबर वापिस जाॶ के नारों से आनधराई बाशिंदों के ख़िलाफ़एहतिजाज का आग़ाज़ होचुका था और हैदराबाद के अवामी जज़बात का एहसास करते हुए शरीफ़ाना मुआहिदा भी तए किया गया, जिस पर रोज़ावल से ही अमल आवरी नहीं की गई।मुत्तहदा रियासत की तशकील के साथ तलंगाना अवाम का अर्सा हयात तंग करने का काम किया गया, जिस के सबब तलंगाना जो आसफ़िया दौर-ए-हकूमत में एक ख़ुशहाल इलाक़ाथा, इंज़िमाम के बाद पसमांदा हो गया।

प्रोफ़ैसर हरी नाथ ने कहा कि सरकारी अहकामात को नाजायज़ अंदाज़ में इस्तिमाल करके तलंगाना अवाम से धोका दही की गई। टी वीवीक ने कहा कि तलंगाना जो हर किस्म की सहूलतों से आरास्ता था मगर इंज़िमाम के बाद से लेकर आज तक तमाम सहूलतें तलंगाना की अवाम से छीन ली गई, जिस के ख़िलाफ़ इंज़िमाम से लेकर आज तक एहतिजाज जारी है ।

उन्हों ने कहा कि आज भी तलंगाना हामीयों के जारी एहतिजाज को सुबू ताज करने की ग़रज़ से एक मुनज़्ज़म साज़िश के तहत मुआहिदात का सहारा लिया जा रहा है जिसे समझने की हमें सख़्त ज़रूरत ही

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