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हैदराबाद को हिन्दुस्तान का हिस्सा बनाने पर सरदार पटेल की सताइश: अडवानी

नई दिल्ली 03 जुलाई: जम्मू कश्मीर के लिए ख़ुसूसी मौक़िफ़ ख़त्म करने का मुतालिबा करने के बाद बी जे पी लीडर एल के अडवानी ने आज हिन्दुस्तान के पहले वज़ीर-ए-दाख़िला सरदार वल्लभी पटेल की ज़बरदस्त सताइश की के उन्होंने इंडियन यूनीयन में हैदरा

नई दिल्ली 03 जुलाई: जम्मू कश्मीर के लिए ख़ुसूसी मौक़िफ़ ख़त्म करने का मुतालिबा करने के बाद बी जे पी लीडर एल के अडवानी ने आज हिन्दुस्तान के पहले वज़ीर-ए-दाख़िला सरदार वल्लभी पटेल की ज़बरदस्त सताइश की के उन्होंने इंडियन यूनीयन में हैदराबाद को शामिल करने के लिए ठोस क़दम उठाया।

जवाहर लाल नेहरु की मुख़ालिफ़त के बावजूद ताक़त के बिल पर सरदार पटेल ने हैदराबाद को हिन्दुस्तान के लिए हासिल करलिया।

अपने ताज़ा ब्लॉग में तहरीर करदा बयान में अडवानी ने वि पी मेनन की एक किताब का हवाला देते हुए लिखा है के वज़ीर-ए-दाख़िला सरदार पटेल ने जवाहर लाल नेहरू की मुख़ालिफ़त के बावजूद हैदराबाद को फ़ौज भेजी और इस शहर को हिन्दुस्तान में शामिल करलिया।

वि पी मेनन ने इंडियन यूनीयन में 564 अहम रियास्तों के दौरान सरदार पटेल के तहत काम किया था। उन्होंने एम के नायरस की एक और किताब का हवाला दिया जिस में लिखा गया था कि जवाहर लाल नेहरु ने हैदराबाद के लिए जम्मू कश्मीर की तर्ज़ पर फ़ैसले की हिमायत की थी लेकिन सरदार पटेल ने निज़ाम हुकूमत को बरख़ास्त करने ताक़त का इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया था।

अगरचे कि अडवानी ने अपने ब्लॉग में जम्मू-ओ-कश्मीर और हैदराबाद के ताल्लुक़ से तवाज़ुन का तज़किरा नहीं किया है। नेहरू कश्मीर की तरह हैदराबाद को भी अक़वाम-ए-मुत्तहिदा में देना चाहते थे जबकि दोनों तरफ मुसलमानों की काबिल ए लिहाज़ आबादी है।

बी जे पी हमेशा इल्ज़ाम आइद करती आरही हैके जवाहर लाल नेहरू ने जम्मू कश्मीर के वाबस्तगी के मसले को अक़वाम-ए-मुत्तहिदा से रुजू करने का फ़ैसला करके ग़लत क़दम उठाया था।

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