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हैदराबाद: निज़ाम के परपोते की मांग, शाही ख़ज़ाने को वापस करे सरकार

हैदराबाद शाही खानदान का बेशकीमती खज़ाना रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के लॉकर्स में बंद है। अब इस खज़ाने को आंध्रप्रदेश के म्यूज़ियम में रखने की मांग उठी है। हैदराबाद के आखिरी निज़ाम के परपोते हिमायत अली मिर्ज़ा ने ये मांग की है। हिमायत अली ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से अपील की है कि शाही खानदान के हीरे-जवाहरात और ख़ज़ाने को आरबीआई के लॉकर्स से निकालकर म्यूजियम में रखा जाए ताकि लोग शादी खानदान के ख़ज़ाने को देख पाएं।

 

लाइव हिंदुस्तान डॉट कॉम की ख़बर के मुताबिक आरबीआई के लॉकर्स में शाही ख़ज़ाना जमा होने के बाद सिर्फ़ 2001 और 2006 में सालार जंग म्यूज़ियम में प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। शाही ज्वैलरी की ये प्रदर्शनी बहुत ही कम वक्त के लिए थी जिसकी वजह से लाखओं लोगों को खज़ाना बिना देखे ही लौटना पड़ा था ।

 

माना जा रहा है कि अगर  सरकार इस मांग को पूरा नहीं करती है तो निज़ाम परिवार सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है । हालांकि हिमायत मां फातिमा फौजिया और उनके चाचा शहमत शाह से मीडिया से सुप्रीम कोर्ट जाने की बात से इंकार कर दिया । निजाम परिवार काफी समय से सरकार से उनका खजाना वापस करने की मांग कर रहा है। खजाने की कीमत 50 हजार करोड़ रुपए बताई गई है

 

खज़ाने की मांग करने वाले हिमातय अली हैदराबाद के सातवें निज़ाम के परपोते हैं। हिमातय का कहना है कि शहर के लोग अपनी ऐतिहासि धरोहर से महरूम है और वो चाहते हैं कि प्रदेश के साथ देश दुनिया के लोग निज़ाम का खज़ाना देंखे । शाही परिवार के इस खजाने को 1995 में आरबीआई के पास जमा कराया गया था, जिसकी उस वक़्त कीमत 215 करोड़ रुपए के करीब थी।

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