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हैदराबाद ब्‍लास्‍ट जांच में FBI की मदद के इम्कान

नई दिल्ली, 26 फरवरी: हैदराबाद धमाकों की जांच में अमेरिका की वफ़ाकी तफतीश एजेंसी (एफबीआई/FBI) की मदद ली जा सकती है। धमाकों की गुत्थी को सुलझाने में जुटी एजेंसियों को यकीनी सुराग जरूर मिल रहे हैं, लेकिन इसके पीछे किसी खास तंज़ीम का हाथ होन

नई दिल्ली, 26 फरवरी: हैदराबाद धमाकों की जांच में अमेरिका की वफ़ाकी तफतीश एजेंसी (एफबीआई/FBI) की मदद ली जा सकती है। धमाकों की गुत्थी को सुलझाने में जुटी एजेंसियों को यकीनी सुराग जरूर मिल रहे हैं, लेकिन इसके पीछे किसी खास तंज़ीम का हाथ होने के बारे में अभी यकीनी तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।

वहीं सुरागों के तार जोड़ने की कवायद में एजेंसियों ने पीर के दिनलगभग तीस लोगों से पूछताछ की। साथ ही हैदराबाद पुलिस और एनआईए की ज्वाइंट टीम बिहार और कर्नाटक में भी कुछ मुश्तबा अफराद (Suspects) की तलाश में जुटी है।

इन धमाकों की जांच कौमी जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपे जाने की तकनीकी तैयारी भी चल रही है।

फिलहाल यह जांच हैदराबाद पुलिस के हाथ में है। इसके अलावा हैदराबाद ब्लास्ट के सुराग तलाशने के लिए महाराष्ट्र की स्पेशल मकोका ने एटीएस को पुणे बम ब्लास्ट के दो मुल्ज़िम फिरोज सैयद और इरफान लांगे से पूछताछ करने की इज़ाज़त दे दी है।

दाखिला वज़ीर ए मुमलिकत ( Home Affairs) आरपीएन सिंह ने बताया कि ज़ाय वाकिया से कई अहम सुराग मिले हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। मगर फिलहाल इस बारे में कुछ भी कहना मुनासिब नहीं है।

वज़ारत ए दाखिला के सलामती महकमा (Department of internal security) के ज़राए के मुताबिक शक की सुई भले ही इंडियन मुजाहिद्दीन की तरफ जा रही है, लेकिन असली खिलाड़ी तक पहुंचने का रास्ता साफ नहीं नजर आ रहा। इसी वजह से आईएम के लड़कों से पूछताछ की जा रही है।

जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि दिलसुखनगर में दोनों ब्लास्ट में रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि इसके लिए टाइम बम का इस्तेमाल किया गया है। इस बीच हैदराबाद पुलिस कमिश्नर ने बयान जारी कर कहा है कि सभी शॉपिंग कांप्लेक्स, सिनेमा और होटलों में सीसीटीवी और मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे।

साथ ही उन्होंने हुक्म दिया कि किसी भी इदारे के बाहर गाड़ियों की पार्किंग नहीं होगी।

आंध्र प्रदेश पुलिस अपनी जांच में अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई की मदद ले सकती है। सीसीटीवी में तीन लोग साइकिल स्टैंड के पास घूमते दिख रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सीसीटीवी फुटेज की तस्वीर का साफ नहीं होना है।

सीसीटीवी फुटेज को ज्यादा साफ करने के लिए उसे एफबीआई के पास भेजा जा सकता है ताकि मुश्तबा की पहचान की जा सके।

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