Tuesday , December 12 2017

होनहार नौजवान मुहम्मद रौशन ने हैदराबाद का नाम रौशन कर दिया

एक ऐसे वक़्त जब कि सिविल सर्विस में मुसलमानों का तनासुब तेज़ी से घटता जा रहा है मुल्क में मुसलमान आई ए एस, आई पी एस, आई एफ एस और आई आर एस ढ़ूढ़ने से नहीं मिलते इन हालात में अगर मुस्लिम तलबा का सिविल सर्विस के लिए इंतिख़ाब अमल में आता है और उन्हें यू पी एस सी इम्तेहानात में कामयाबी मिलती है तो ना सिर्फ़ उन के ख़ानदानों में बल्कि सारी मिल्लत में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है।

ऐसी ही ख़ुशी की लहर आजकल हैदराबादी मुसलमानों में पाई जाती है क्यों कि हमारे इस तारीख़ी शहर हैदराबाद से ताल्लुक़ रखने वाले होनहार नौजवान मुहम्मद रौशन का सिविल सर्विस के लिए इंतिख़ाबअमल में आया है। यू पी एस सी इम्तेहानात में कामयाबी हासिल करने वाले 1236 उम्मीदवारों में मुहम्मद रौशन को 44 वां मुक़ाम हासिल हुआ है।

इस तरह उम्मीद है कि वो मुस्तक़बिल में अपने ही शहर में एक आई ए एस ओहदेदार की हैसियत से ख़िदमात अंजाम देंगे। राक़िमुल हरूफ़ ने मुहम्मद रौशन से बात की और ये जानना चाहा कि इस क़दर बड़ी कामयाबी पर वो कैसा महसूस कर रहे हैं? मुहम्मद रौशन ने जो मुनकसिरुल मिज़ाज नौजवान हैं बताया कि सिविल सर्विस में कामयाबी पर ना सिर्फ़ वो बल्कि उन का सारा ख़ानदान वालिदैन, बहन बहनोई और दीगर अरकान ख़ानदान बहुत ख़ुश हैं।

वो सब से पहले अल्लाह ताला का शुक्र अदा करते हैं कि उस ने उन्हें ये कामयाबी अता की है। एक और सवाल के जवाब में मुहम्मद रौशन ने जो हैदराबाद का नाम रौशन कर दिया है बताया कि कामयाबी का क्रेडिट वो अपने वालिदैन, अरकाने ख़ानदान, लेक्चरर्स और टीचर्स को देना चाहेंगे क्यों कि उन लोगों की कोशिशों के बाइस ही उन में आगे बढ़ने और कुछ कर दिखाने का हौसला पैदा हुआ है और इसी हौसले ने सिविल सर्विस इम्तेहानात में कामयाबी दिलाने में अहम रोल अदा किया है।

मुहम्मद रौशन के मुताबिक़ अगर्चे उन्हें बचपन से ही आई ए एस ऑफीसर बनने की ख़ाहिश नहीं थी लेकिन हमेशा यही ख़ाहिश रहा करती थी कि एक अच्छी नौकरी मिले बावक़ार ओहदा पर फ़ाइज़ हूँ और ऐसा काम करें जिस पर माँ बाप को फ़ख़र हो और आज अल्लाह के फ़ज़लो करम से उन्हों ने सिविल सर्विस में 44वां मुक़ाम हासिल करते हुए अपने माँ बाप का सर फ़ख़्र से ऊंचा कर दिया है जो अपने फ़र्ज़ंद दिलबन्द की ग़ैर मामूली कामयाबी पर अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे हैं।

यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी होगा कि इस मर्तबा सारे मुल्क से जिन 1232 उम्मीदवारों ने सिविल सर्विसेस में कामयाबी हासिल की इन में मुस्लिम उम्मीदवारों की तादाद सिर्फ़ 38 है इस तरह उन का तनासुब 3.07 फ़ीसद बनता है। काश हमारी मुस्लिम तन्ज़ीमें और जमाअतें इस मसअले पर संजीदगी से ग़ौर करतीं। —- मुहम्मद रियाज़ अहमद

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