Thursday , December 14 2017

हज़रत इमाम हुसैन रज़ी‍० की बद्‍- दुआ

मुहर्रम की दसवीं तारीख़ को हज़रत इमाम हुसैन रज़ी० ने अपने ख़ेमा के इर्दगिर्द ख़ंदक़ खुदवा दी थी और उसमें लकड़ियां डाल कर आग लगा दी गई थी, ताकि मुहतरम ख़वातीन शब ख़ून और दीगर हमलों से महफ़ूज़ रहें और दुश्मन ख़ेमा तक ना पहुंच सके।

मुहर्रम की दसवीं तारीख़ को हज़रत इमाम हुसैन रज़ी० ने अपने ख़ेमा के इर्दगिर्द ख़ंदक़ खुदवा दी थी और उसमें लकड़ियां डाल कर आग लगा दी गई थी, ताकि मुहतरम ख़वातीन शब ख़ून और दीगर हमलों से महफ़ूज़ रहें और दुश्मन ख़ेमा तक ना पहुंच सके।

एक यज़ीदी बेदीन ने आग रोशन देख कर कहा ऐ हुसैन! आतिश दोज़ख़ से पहले ही तुम ने अपने आप को आग में डाल लिया है (मआज़ अल्लाह)। हज़रत इमाम आली मक़ाम रज़ी० ने इस बदबख़्त की बात सुन कर फ़रमाया ऐ दुश्मन-ए-ख़ुदा! तू झूट बोल रहा है।

फिर आपने क़िबले की तरफ़ रुख़ कर फ़रमाया ऐ अल्लाह! उसे आग की तरफ़ खींच ले। ये बद दुआ करते ही इस बेदीन के घोड़े का पांव एक सूराख़ में फंस गया। घोड़ा गिरा, लगाम हाथ से छूटी, बदबख़्त का पैर लगाम में उलझा और घोड़ा उसे अपने साथ घसीट कर भागने लगा, यहां तक कि उसे ख़ंदक़ में दहकती हुई आग में लाकर डाल दिया और ख़ुद चला गया।

हज़रत इमाम हुसैन रज़ी० ने सजदा-ए-शुक्र अदा किया और सजदे से सर उठाकर बाआवाज़ बुलंद फ़रमाया इलाही! हम तेरे रसूल (स०अ०व०)) की ऑल हैं, हमारा इंसाफ़ ज़ालिमों से लेना।

इसी दौरान एक और बेदीन ने हज़रत इमाम-ए-आली मक़ाम को मुख़ातिब करके कहा ऐ हुसैन! देखो नहर फरात कैसी मौजें मार रहा है, मगर इससे तुमको पानी का एक क़तरा नहीं मिलेगा और यूं ही प्यासे क़त्ल किए जाओगे।

हज़रत इमाम-ए-आली मुक़ाम इस बदबख़्त की बात सुनकर आज़ुरदा-ए-ख़ातिर हुए और आबदीदा होकर ये दुआ फ़रमाई कि इलाही! इसे प्यासा मार। यकायक इसके घोड़े ने शोख़ी करके उसे गिरा दिया और भाग निकला।

बदबख़्त घोड़ा पकड़ने के लिए दौड़ता रहा, प्यास ग़ालिब हुई, प्यास-प्यास चिल्लाता रहा, मगर हलक़ से पानी ना उतरा, आख़िर इसी प्यास की हालत में मर गया। (तज़किरा)

वाज़िह रहे कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ी० अल्लाह तआला के महबूब-ओ-मक़बूल बंदे थे। अल्लाह तआला ने आप की दुआ और बददुआ दोनों कुबूल की, मगर शहादत चूँकि आपके नाम लिखी जा चुकी थी। अल्लाह और इसके रसूल (स०अ०व०) की यही मर्ज़ी थी,इसलिए आप राज़ी ब रज़ा-ए-हक़ थे और आपने ब कमाल सब्र-ओ-रज़ा‍ ए‍ जाम ए शहादत नोश फ़रमाया।

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