Monday , January 22 2018

क़ाज़ीपेट में वैगन रेपेर सेंटर के क़ियाम का मुतालिबा

क़ाज़ीपेट को डिवीज़न की सतह पर तरक़्क़ी के लिए जल्द से जल्द इक़दामात किए जाएं। वैगन रेपेर सेंटर का क़ियाम तात्तुल का शिकार, क़ाज़ीपेट से कई रास्त ट्रेन चलाने का मुतालिबा, इन ख़्यालात का इज़हार साबिक़ फ़्लोर लीडर म़्यूनिसिपल कारपोरेशन व

क़ाज़ीपेट को डिवीज़न की सतह पर तरक़्क़ी के लिए जल्द से जल्द इक़दामात किए जाएं। वैगन रेपेर सेंटर का क़ियाम तात्तुल का शिकार, क़ाज़ीपेट से कई रास्त ट्रेन चलाने का मुतालिबा, इन ख़्यालात का इज़हार साबिक़ फ़्लोर लीडर म़्यूनिसिपल कारपोरेशन वरंगल मुहम्मद अबू बकर एडवोकेट ने नुमाइंदा सियासत वरंगल एम ए नियम से एक ख़ुसूसी मुलाक़ात के मौक़ा पर किया।

उन्होंने कहा कि क़ाज़ीपेट में वैगन रेपेर शेड दो साल क़ब्ल मंज़ूर हुआ था। इसके लिए कड़पी कोंडा के पास 100 एकड़ की ज़रूरत थी, जिसमें से 54 एकड़ इंडो मिनट की अराज़ी हासिल करने के लिए सर्वे भी किया गया था, जिसके लिए कलेक्टर रिपोर्ट बनाकर हुकूमत को रवाना करना था और माबाक़ी अराज़ी हुकूमत रेलवे को देने से वैगन रेपेर सेंटर का क़ियाम अमल में लाया जाने वाला था, लेकिन इंडो मेंट की अराज़ी हासिल करने के ताल्लुक़ से फाईल कलेक्टर के पास गर्द-ओ-गुबार में पड़ी हुई है जब कि अनंतपुर में इंडोमेंट की 17 एकड़ अराज़ी सॉफ्टवेर पार्क को मिनिस्टर पोनाला लकशमया ने अलॉट की जब कि ये वरंगल ज़िला से ताल्लुक़ रखने के बावजूद अराज़ी रेलवे को हवाले करने में तसाहली बरती। इसकी क्या वजूहात हैं? हालाँकि इस रेलवे वैगन रेपेर शेड के क़ियाम अमल में आने से कम से कम 8 ता 10 हज़ार लोगों को मुलाज़मत के मौक़े फ़राहम होते हैं।

इलावा अज़ीं इस के क़ियाम से 30 हज़ार से ज़ाइद लोगों को बॉलर अस्त रोज़गार मिलने के इम्कानात थे। मुहम्मद अबू बकर ने मज़ीद कहा कि क़ाज़ीपेट रेलवे स्टेशन साउथ इंडिया का एक क़दीम रेलवे इस्टेशन है जो नॉर्थ और साउथ इंडिया को जोड़ता है। गुज़श्ता पंद्रह से बीस साल क़ब्ल क़ाज़ी पेट रेलवे जंक्शन पर इतनी रौनक थी कि यहां पर लोको शैड, लोडिंग अन लोडिंग का काम हुआ करता था।

आंधरा के क़ाइदीन और ऑफीसरस मिल कर बड़ी ही होशियारी के साथ यहां की तमाम सहूलयात को विजयवाड़ा मुंतक़िल कर चुके हैं। यहां तक कि यहां के टी सी, गार्ड, ड्राईवर की ख़िदमात को गुज़श्ता चारता पाँच बरसों में ट्रांसफ़र करके विजयवाड़ा को मुंतक़िल कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि क़ाज़ीपेट में गाड़ियों को धोने का सेंटर भी क़ायम था, लेकिन ये सहूलत भी क़ाज़ीपेट में ख़तम करके विजयवाड़ा मुंतक़िल कर चुके हैं, जिसमें तीन से चार सौ मुलाज़मीन काम करते हैं। आंधरा के क़ाइदीन आहिस्ता आहिस्ता क़ाज़ीपेट जंक्शन की अहमियत को घटाने में लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि क़ाज़ीपेट में वैगन फैक्ट्री को जल्द से जल्द क़ायम करने से यहां की पुरानी रौनक वापस आएगी। पार्लीमेंट में बजट के मौक़ा पर क़ाज़ीपेट को तरक़्क़ी देने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा फंड्स मंज़ूर किया जाय। क़ाज़ी पेट को डीवीज़न की सतह पर तरक़्क़ी दी जाय जब कि साउथ सेंटर्ल रेलवे में सबसे ज़्यादा आमदनी क़ाज़ीपेट जंक्शन से ही आती है।

ट्रांसपोर्ट और पैसेंजर यहां से ज़्यादा सफ़र करते हैं। उन्होंने कहा कि विजयवाड़ा और गुंटूर के दरमियान 40 किलो मीटर का फ़ासिला भी नहीं है, लेकिन दोनों रेलवे स्टेशनों को डीवीज़न बनाया गया है। गुज़श्ता साल रेलवे हॉस्पिटल की तरक़्क़ी के लिए वीजयवाड़ा, विशाखापटनम, काकीनाडा को लाखों रुपय मंज़ूर किए गए हैं, लेकिन क़ाज़ीपेट रेलवे हॉस्पिटल को एक रुपया भी नहीं दिया गया जब कि यहां रेलवे के हज़ारों मुलाज़मीन काम करते हैं।

अब हाल ही में हुकूमत की जानिब से 7 करोड़ रुपय की मंज़ूरी अमल में लाई गई। उन्होंने कहा कि आने वाले बजट सेशन में साउथ सेंटर्ल रेलवे में हुकूमत क़ाज़ीपेट को डीवीज़न बनाने और हॉस्पिटल को अपग्रेड के लिए ज़्यादा से ज़्यादा बजट मंज़ूर किया जाय। उन्होंने कहा कि एक माह क़ब्ल केरला के पालाकट गांव में रेलवे की कोच फैक्ट्री की मंज़ूरी अमल में लाई गई।

हुकूमत केरला की जानिब से 259 एकड़ अराज़ी रेलवे को दी, जिससे तीन साल की मुद्दत में एक कोच फैक्ट्री क़ायम होने पर 550 कोच्स तैयार होंगे जब कि क़ाज़ीपेट में कोच फैक्ट्री का गुज़श्ता 30 साल से मुतालिबा किया जा रहा है। क़ाज़ीपेट रेलवे का दिल है। यहां से चारों तरफ़ जाने के लिए रेलवे लाईन हैं।

उन्हों ने कहा कि मर्कज़ी हुकूमत में साउथ इंडिया से ताल्लुक़ रखने वालों को रेलवे मिनिस्ट्री नहीं मिल रही है। एक मर्तबा कर्नाटक (बैंगलोर) के जाफ़र शरीफ रेलवे मिनिस्टर और दत्ता तुरीय मिनिस्टर आफ़ स्टेट बने। इसके बाद से कोई नहीं, जिसकी वजह से यहां की तरक़्क़ी ज़्यादा नहीं हो रही है।

उन्होंने मुतालिबा किया कि रेलवे बजट के मौक़ा पर क़ाज़ीपेट से बैंगलोर, क़ाज़ीपेट से मुंबई, काग़ज़ नगर से तिरूपति, भद्राचलम से शिर्डी, करीमनगर से हैदराबाद नई ट्रेनों को चलाया जाय और नई रेलवे लाईन भी बिछाई जाय। उन्होंने कहा कि हर 25 से 50 किलो मीटर की दूरी पर अतराफ़ में बड़ी बड़ी आबादी वाले गाँव हैं। नई ट्रेनों को चलाने से यहां के मुसाफिरेन को सहूलत होगी।

TOPPOPULARRECENT