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क़िस्सा 3 बजे का जिसके बाद तमाम सियासी क़ाइदीन के 3 बज गए

हैदराबाद 04 फरवरी:हैदराबाद में 3 बजे के बाद के वाक़ियात ने अक्सर सियासी पार्टीयों के तीन बजा दीए हैं। डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर के बेटे पर तमांचे के बाद पार्टी कैडर में ख़ौफ़ से ज़्यादा तशवीश पैदा हो गई। दूसरी तरफ़ क़ाइद अप्पोज़ीशन मुहम्मद अली शब्बीर के साथ साथ सदर पीसीसी उत्तम कुमार रेड्डी के साथ ज़िद-ओ-कोब और तीसरी तरफ़ पुराने हरीफ़ अमजद उल्लाह ख़ां ख़ालिद पर घूंसों की बारिश ! आख़िर ये सब वाक़ियात का 3 बजे के बाद होना इत्तेफ़ाक़ है या फिर मंसूबा बंदी ? इत्तेलाआत के मुताबिक रुकने पार्लियामेंट ने कम फ़ीसद राय दही के बाद अपनी परेशानी को ज़्यादा देर तक क़ाबू में नहीं रख सके और फ़ौरी अपने एमएलए को चीफ़ मिनिस्टर के फ़ार्म हाउज़ रवाना किए जहां उनकी मुलाक़ात के बाद 3:15 मिनट पर पुलिस को नरम रवैया इख़तियार करने की हिदायत वसूल हुई।

उस के बाद क्या डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर तो क्या क़ाइद अप्पोज़ीशन अपने क़ाबू से बाहर जमात के ग़ुंडों ने दहश्त का ऐसा नंगा नाच खेला कि इस की ज़द में डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर के बेटे आज़म अली ख़ुर्रम भी आगए। वैसे मुहम्मद अली शब्बीर कुछ दिनों से अपनी शोला-बयानी और चुभते हुए बयानात की वजह से MIM को खटक रहे थे और इस से पहले देखा गया तो हुकूमत की नाकामियों को कभी कौंसिल में तो कभी प्रेस के ज़रीये खटकने वाले क़ाइद अप्पोज़ीशन को सबक़ सिखाने का मौक़ा मिल गया।

जहां MIM ग़ुंडों ने शब्बीर अली को मुक्कों और लातों से नवाज़ा तो वहीं अपने पुराने हरीफ़ अमजद उल्लाह ख़ां को भी बंदूक़ की नोक पर घूँसे रसीद किए गए।

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