Wednesday , December 13 2017

क़ुरान-ए-करीम में रुहानी (आत्मीक) जिस्मानी बीमारीयों से नजात

हैदराबाद। क़ुरान-ए-करीम अन्य‌ आस्मानी किताबों की तस्दीक़ के लिए और सारी इंसानियत की हिदायत-ओ-रहनुमाई के लिए नाज़िल किया गया है। क़ुरान-ए-करीम के अल्फ़ाज़‍ ओ‍ मानी और हुरूफ़ की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी परवरदिगार-ए-आलम ने अपने ज़िम्मा ले रखी

हैदराबाद। क़ुरान-ए-करीम अन्य‌ आस्मानी किताबों की तस्दीक़ के लिए और सारी इंसानियत की हिदायत-ओ-रहनुमाई के लिए नाज़िल किया गया है। क़ुरान-ए-करीम के अल्फ़ाज़‍ ओ‍ मानी और हुरूफ़ की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी परवरदिगार-ए-आलम ने अपने ज़िम्मा ले रखी है।

क़ुरान-ए-करीम में रुहानी और जिस्मानी बीमारीयों से नजात का पहलू भी मौजूद है। इन ख़्यालात का इज्हार मुफ़्ती अहमद हसीब क़ास्मी ख़तीब मस्जिद आमिरा, आबिड्स-ओ-मुदीर माहनामा निदाए सालहीन ने जुमा के इज्तेमा से ख़िताब (संबोधीत) करते हुए किया।

मौलाना ने ख़िताब के दौरान कहा कि अल्लाह ताला इरशाद फ़रमाता है: और हम ने क़ुरान मजीद को नाज़िल किया है,
इस कलाम में शिफ़ा है और ईमान वालों के लिए ये कलाम रहमत है। रोज़ाना थोडा सा क़ुरान मजीद पढने का एहतिमाम करना चाहीए। मर्ज़ (बीमारी) लाहक़ होगया तो क़ुरान-ए-करीम की आयात की तिलावत की बरकत से इस मर्ज़ से अल्लाह ताला शिफ़ा नसीब फ़रमाते हैं। बच्चों की तर्बीयत में और तालीम में क़ुरान-ए-करीम से शग़फ़ और इस की तिलावत की ख़ुसूसीयत के साथ
ताकीद की जाय। रात को सोते वक़्त आयत-ऊल-कुर्सी और तीनों क़ुल की सूरतों की तिलावत का ख़ुद भी एहतिमाम करें और अपने घर के सारे अफ्राद को भी इस की तल्क़ीन करते रहें।

रसूल अकरम (स.व.) ख़ुद भी इन बातों पर अमल फ़रमाते और सहाबा को तल्क़ीन फ़रमाते अमल करने की । एक हदीस में है रसूल अकरम (स.व.) ने इरशाद फ़रमाया : जिस घर में सूरत बक़रा की आख़िरी दो आयतें पढ़ी जाएं, इस घर के क़रीब भी शैतान नहीं आता।

क़ुरान-ए-करीम से हर मुसल्मान अपना रिश्ता मज़बूत करे। इस में बेहतरी और भलाई है। मौलाना ने अख़ीर में सारे मुसल्मानों पर ज़ोर दिया कि क़ुरान-ए-करीम रोज़ाना पढ़ने का एहतिमाम करें।

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