Wednesday , December 13 2017

क़ौमी टीम के लिए इंतिख़ाब के वक़्त सिर्फ़ स्कोर जेहन में ना रखा जाय

सीनियर हिंदुस्तानी बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर का एहसास है कि सलेक्टर्स को चाहिए कि वो क़ौमी टीम का इंतिख़ाब करते हुए दबाव‌ के तहत मुज़ाहरा करने खिलाड़ियों की सलाहियतों को जेहन में रखें ना कि उसके आदाद-ओ-शुमार ( स्कोर्स ) को जेहन में रखा जा

सीनियर हिंदुस्तानी बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर का एहसास है कि सलेक्टर्स को चाहिए कि वो क़ौमी टीम का इंतिख़ाब करते हुए दबाव‌ के तहत मुज़ाहरा करने खिलाड़ियों की सलाहियतों को जेहन में रखें ना कि उसके आदाद-ओ-शुमार ( स्कोर्स ) को जेहन में रखा जाय।

तेंदुलकर ने कहा कि स्लैक्शन स्कोर बुक को जेहन में रखने के ताल्लुक़ से नहीं है। एक स्लैक्टर ऐसे खिलाड़ी को मुंतख़ब करता है जो बड़े स्कोर करता है लेकिन ये तरीक़ा काम नहीं करेगा। मैंने ऐसे भी खिलाड़ियों को देखा है जो डोमेस्टिक सतह पर बेहतरीन मुज़ाहरा करते हैं और अच्छा स्कोर करते हैं लेकिन वो इंटरनेशनल क्रिकेट में अच्छा मुज़ाहरा नहीं करसकते।

ये सब कुछ वीज़न से मुताल्लिक़ है। जब स्लैक्शन का मरहला होता है तो खिलाड़ी का तजज़िया(तर्क वितर्क) किया जाना चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी कुछ मैचस में नाकाम भी होजाता है तो ये देखे जाने की ज़रूरत है कि आया वो दबाव‌ के तहत खेलने की सलाहियत रखता है या नहीं या फिर वो अपने मंसूबों को बैन-उल-अक़वामी सतह पर अमल दरआमद करसकता है या नहीं।

उन्होंने कहा कि क्रिकेट में तबदीलियां आती गई हैं और टी 20 भी राइज होगया है। इसके नतीजे में क्रिकेट में मज़ीद दिलचस्पियां पैदा हुई हैं और नताइज ज़्यादा बरामद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्रिकेट ही वो वाहिद खेल है जो तीन अंदाज़ में खेला जाता है और इससे ना सिर्फ़ क्रिकेटर्स में बल्कि शायक़ीन में भी दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।

उन्होंने कहा कि नई तख़लीक़ी सलाहियतें सामने आई हैं और टेस्ट क्रिकेट में भी ज़्यादा नताइज बरामद हो रहे हैं। बल्लेबाज़ ख़तरात मोल लेने को तैयार हैं। सचिन कर्नाटक क्रिकेट एसोसीएश‌ण की प्लाटीनम जुबली तक़ारीब से ख़िताब कर रहे थे। साबिक़ हिंदुस्तानी कप्तान श्री गंगोली ने कहा कि टी 20 से टेस्ट क्रिकेट पर असर हुआ है क्योंकि खिलाड़ी मज़ीद जारिहाना होते जा रहे हैं और ज़्यादा नताइज भी निकल रहे हैं।

क्रिकेट में इस तबदीली से नई तख़लीक़ हुई है। जब टेस्ट क्रिकेट की बात होती है तो खिलाड़ियों को अपने तौर पर अंदाज़ में तबदीली करनी होती है और हर खिलाड़ी की तकनीक अलग होती है। खिलाड़ियों को अपनी बुनियादी तकनीक पर अमल पैरा होना पड़ता है और यही एहमियत का हामिल है।

साबिक़ कप्तान राहुल डरावीड ने कहा कि टी 20 ने क्रिकेटर्स को मज़ीद लचकदार बनादिया है। उन्होंने कहा कि आप को कुछ नए शॉट्स खेलने सीखना होगा। आप हर गेंद का दिफ़ा नहीं करसकते जैसा कि वो टेस्ट क्रिकेट में करते थे। उन्होंने कहा कि अच्छे खिलाड़ी नए हालात के मुताबिक़ सीखते रहते हैं।

अगर आप करस गेल माईकल हंसी या ए बी डी वलयर्स को देखें जिन्होंने गुजिश्ता आई पी एल में अच्छा मुज़ाहरा किया था तो ये सब के सब अच्छे टेस्ट खिलाड़ी भी हैं। ऐसे में आप को अपनी बुनियादी तकनीक को बेहतर और मजबूत‌ बनाने की ज़रूरत है। खेल में इस्तिमाल होने वाली मुख़्तलिफ़ टैक्नालोजीज़ से ख़ुद को हम आहंग करने के ताल्लुक़ से डरावीड ने तेंदुलकर ने कहा कि 2003 में उन्होंने ड्रेसिंग रुम में लैपटॉप देखा था और वो हैरान रह गए थे।

वो ये समझने को तैयार नहीं था कि टैक्नालोजी से किस तरह खेल में बेहतरी पैदा होसकती है लेकिन वक़्त गुज़रने के साथ साथ उन्हें उस की एहमियत का अनादज़ होगया है। इससे हमें अपनी इनिंगस‌ की मंसूबा बंदी करने में मदद मिलती है। तेंदुलकर ने कहा कि टी 20 से टेस्ट क्रिकेट में बुनियादी सलाहिय‌तें अहम हैं। टी 20 में खिलाड़ियों को सिर्फ़ शॉट्स खेलने होते हैं। यही वो फॉर्मट है जिस में तीन ता चार गेंदों में आप हीरो बन सकते हैं।

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