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ख़वातीन के तहफ़्फ़ुज़ के लिए फ़ाईट बैक सॉफ्टवेर तैयार

नई दिल्ली, २० जनवरी (एजैंसीज़) हिंदूस्तान में अब ख़वातीन की एक बड़ी तादाद मुल्की मआशी तरक़्क़ी में हिस्सा ले रही हैं। लेकिन जहां बड़े शहरों में उन के लिए काम और मुलाज़मत के मौके बढ़े हैं वहीं मुलाज़मत पेशा ख़वातीन को कई मसाइल का भी सामना क

नई दिल्ली, २० जनवरी (एजैंसीज़) हिंदूस्तान में अब ख़वातीन की एक बड़ी तादाद मुल्की मआशी तरक़्क़ी में हिस्सा ले रही हैं। लेकिन जहां बड़े शहरों में उन के लिए काम और मुलाज़मत के मौके बढ़े हैं वहीं मुलाज़मत पेशा ख़वातीन को कई मसाइल का भी सामना करना पड़ रहा है जिन में सब से अहम मसला है इन का तहफ़्फ़ुज़।

हाल ही में एक कंपनी ने एक ऐसा इलैक्ट्रॉनिक आला तैयार किया है जिसे ख़वातीन किसी ख़तरा की सूरत में अपनी मदद के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। चीना सेका उन बहुत सी ख़वातीन में से एक है जो दफ़्तर में काम करती है। दफ़्तर से निकलते हुए उसे रात हो जाती है। वो टैक्सी से घर के क़रीबी स्टाप तक जाती है जहां से इस का घर पाँच से 10 मिनट की पैदल मुसाफ़त पर है।

टैक्सी में बैठते वक़्त चीना अपने मोबाईल पर एक सॉफ्टवेर फ़ाइट बैक की मदद लेती है जो बतौर ख़ास उन जैसी ख़वातीन की हिफ़ाज़त को यक़ीनी बनाने के लिए बनाया गया है। ये सॉफ्टवेर जी पी एस की मदद से उन ख़वातीन के रास्ते का रिकार्ड रखना शुरू कर देता है। जगदीश मिश्रा, ये सॉफ्टवेर तैयार करने वाली कंपनी के सरबराह हैं।

इन का कहना है कि ख़वातीन ख़तरे की सूरत में एक बटन दबा सकती हैं और उन का पैग़ाम फ़ौरी तौर पर मोबाईल मैसेज, ई मेल और फेसबुक के ज़रीया उन के दोस्तों और रिश्तेदारों तक पहुंच जाता है जिन का नाम मुतास्सिरा ख़ातून के फ़ाइट बैक सॉफ्टवेर की फ़हरिस्त में मौजूद होता है। 2010 में हुकूमती आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ दिल्ली में ख़वातीन को हरासाँ करने के तक़रीबन 400 वाक़ियात दर्ज किए गए।

जिस से दिल्ली में ख़वातीन की हिफ़ाज़त के मसाइल उजागर हुए। कल्पना विश्वानाथ ख़वातीन के हुक़ूक़ के तहफ़्फ़ुज़ की तंज़ीम जा गौरी से मुंसलिक है। ये तंज़ीम शहरों को ख़वातीन के लिए ज़्यादा महफ़ूज़ बनाने के लिए सरगर्म है। इन का कहना है कि अगर हमारे शहरों में समाज, पुलिस और बुनियादी ढाँचे को मसाइल दरपेश हैं तो हमें उन की तरफ़ तवज्जा देना होगा।

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