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ख़वातीन के ख़िलाफ़ जराइम पर आहनी पंजा से क़ाबू पाने की ज़रूरत

नई दिल्ली, 4 जनवरी: ये दुहराते हुए कि ख़वातीन के ख़िलाफ़ जराइम जैसे इस्मत रेज़ि नाक़ाबिल-ए-क़बूल हैं, हुकूमत ने आज कहा कि उन पर आहनी पंजा से क़ाबू पाने की ज़रूरत है। मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली एज

नई दिल्ली, 4 जनवरी: ये दुहराते हुए कि ख़वातीन के ख़िलाफ़ जराइम जैसे इस्मत रेज़ि नाक़ाबिल-ए-क़बूल हैं, हुकूमत ने आज कहा कि उन पर आहनी पंजा से क़ाबू पाने की ज़रूरत है। मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली एजैंसीयों और फ़ौजदारी निज़ाम इंसाफ़ के रोल पर यहां 16 दिसम्बर को 23 साला तालिबा की बहीमाना इजतिमाई रेज़ि और इस पर वहशयाना हम के बाद तन्क़ीदें होने लगी हैं जबकि पिछ्ले हफ़्ते वो सिंगापुर के अस्पताल में फ़ौत होगई।

इस किस्म के वाक़ियात और ख़वातीन और हमारे समाज के कमज़ोर तर तबक़ात के ख़िलाफ़ तैश का मुज़ाहरा हमारी जमहूरीयत के लिए नाक़ाबिल-ए-क़बूल है। इन चीज़ों पर आहनी पंजा के साथ क़ाबू पाने की ज़रूरत है, उन्होंने मुल्क के आला ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस क़ियादत की कान्फ़्रैंस से ख़िताब में ये बात कही, जो दिल्ली गैंग रेप वाक़िये के तनाज़ुर में तलब की गई।

शिंदे ने कहा कि मुल्क की आज़ादी के 65 साल बाद भी ख़वातीन और दर्ज फ़हरिस्त तबक़ात और दर्ज फ़हरिस्त क़बाइल के ख़िलाफ़ जराइम में कमी नहीं आई है हालाँकि मुजरिमीन को रोकने के लिए मुख़्तलिफ़ क़ानून साज़ीयाँ हुई हैं। उन्होंने कहा, हमें सारे सिस्टम के नए अंदाज़ की ज़रूरत है, हमारे तमाम हामिलियन मुफ़ादात के रोल, हमारे क़वानीन की मौज़ूनियत, नाज़ुक मौके पर नफ़ाद का मव‌सरपन, स्कूली सतह से शुरूआत करते हुए बेदारी और हस्सास पन में इज़ाफे की ज़रूरत और हमारे समाज के हाशीयों पर रहने वाले तमाम लोगों का अहाता करने में नई सूरत गिरी दरकार है।

वज़ीर-ए-दाख़िला ने कहा कि ये अयाँ है कि क़ानून साज़ीयाँ तो हल का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं लेकिन बुनियादी मुश्किल अमल दरआमद की सतह पर मौजूद है जहां बाअज़ औक़ात बुनियादी हक़ायक़ क़ानून पर मव‌सर अमल आवरी के लिए रुकावट बन जाते हैं। उन्होंने कहा, जुर्म के तमाम मरतकबीन के ख़िलाफ़ आजलाना कार्रवाई से ही क़ानून का एहतेराम आएगा।

हमारी बुनियादी मक़सद इस तरह की रुकावटों का पता चलाना, हमारे क़ानून में और तहक़ीक़ात के तरीका-ए-कार और नहज में दरकार तरामीम तजवीज़ करना है, ताकि मुक़द्दमों का जल्द इख़तेताम हो और मुजरिम को एक माक़ूल वक़्त में सज़ा होजाए। शिंदे ने कहा कि हिंदूस्तान की रिवायत में हर ख़ातून कोई माँ, बीवी और बेटी की अलामत है और ये तमाम तहज़ीबों और मज़ाहिब ने अच्छी तरह तस्लीम किया है कि ख़वातीन से बेइज़्ज़ती और उन के ख़िलाफ़ तशद्दुद ख़बीस ज़हनों का इज़हार है।

वज़ीर-ए-दाख़िला ने कहा कि सादा तौर पर कहीं तो ये बस नाक़ाबिल-ए-क़बूल है कि हमारे समाज की ख़वातीन को ख़ौफ़ और इज़तिराब के माहौल में ज़िंदा रहना चाहीए। तमाम शहरीयों की हिफ़ाज़त और सलामती को यक़ीनी बनाने की ज़िम्मेदारी हुकूमत पर आइद होती है।

शिंदे ने उम्मीद ज़ाहिर की कि दिन भर तवील कान्फ़्रैंस यक़ीनी बनाएगी कि हर कोई अपने ज़हन और तवानाइयों को मरबूत अंदाज़ में बरुए कार लाते हुए महफ़ूज़ समाज के तईं काम करे जहां ख़वातीन के ख़िलाफ़ जुर्म और एस सीज़ और एस टीज़ के ख़िलाफ़ मज़ालिम इक्का दुक्का वाक़िया बन कर रह जाये।

मुमलिकती वज़ीर बराए दाख़िला आर पी एन सिंह ने कहा कि दिल्ली वाक़िये की शिकार तालिबा के लिए बेहतरीन खिराज ये यक़ीनी बनाना होगा कि ऐसा वाक़िया दुबारा ना हो।

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