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ख़वातीन पर हुज़ूर अकरम के अज़ीम एहसानात

ज़हीराबाद,30 जनवरी: मूसानगर कॉलोनी ज़हीराबाद में मुनाक़िदा जश्न-ए-ईद मीलाद-उन्नबी बराए ख़वातीन के कसीर इजतिमा से ख़िताब करते हुए डा.

ज़हीराबाद,30 जनवरी: मूसानगर कॉलोनी ज़हीराबाद में मुनाक़िदा जश्न-ए-ईद मीलाद-उन्नबी बराए ख़वातीन के कसीर इजतिमा से ख़िताब करते हुए डा. मुफ़्तिया रिज़वाना ज़रीन प्रिंसिपल जामिअतुलमोमिनात हैदराबाद ने कहा कि हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ख़वातीन पर अज़ीम एहसानात हैं, आप‌ की तालीमात ख़वातीन की इज़्ज़त का सबब बनें, इस्लाम से पहले ख़वातीन पर ज़ुलम-ओ-सितम किया जाता था लड़कीयों को ज़िंदा दफ़न किया जाता था, बेवा के साथ ग़लत सुलूक किया जाता था, जहालत आम थी। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत ख़दीजातुलकुब्रा ओ 40साला बेवा ख़ातून से निकाह फ़रमाकर बेवा से नफ़रत को दूर किया, और फ़रमाया जिन के पास तीन लड़कीयां हों और उन की अच्छी तर्बीयत-ओ-तालीम की जाये, बालिग़ होने पर निकाह किया जाये तो इस के लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी सुनाई और फ़रमाया कि लड़कीयां अल्लाह की रहमत हैं।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने माँ के क़दमों के नीचे जन्नत है क़रार दे कर उन के मुक़ाम-ओ-मर्तबा को बुलंद किया।इस्लाम ने औरतों को मीरास में हिस्सादार ठहराया। जलसे का आग़ाज़ कारिया मीसा अफ्शीन की क़िरात‌, हाफ़िज़ा समीरा ख़ातून की नाअत शरीफ़ से हुआ। निज़ामत के फ़राइज़ मुफ़्तिया रुक़य्या फ़ातिमा ने अंजाम दिए। डा. मुफ़्तिया आमना बतूल, नायब शेखुलतफ़सीर जामातुलमोमिनात हैदराबाद ने कहा कि अल्लाह तआला ने सब से पहले नबी करीम के नूर को पैदा फ़रमाया।

हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अज़मत-ओ-मुहब्बत हर मुसलमान के क़ल्ब में होना ज़रूरी है, अल्लाह तआला ने
हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मबऊस फ़रमाकर मोमिनीन पर अज़ीम एहसान फ़रमाया। हुज़ूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम‌ की तालीमात पर अमल करने के लिए ख़वातीन को तलक़ीन करते हुए कहा कि जो हज़ूर के उस्वा ए हसना और हयाते तय्यबा पर अमल करें तो दुनिया-ओ-आख़िरत में कामयाबी हासिल होती है।

आलिमा हाफ़िज़ा ज़रीना बेगम मुअल्लिमा मदरसा सिराजुलबनात ज़हीराबाद ने कहा कि हुज़ूरे अकरम ने फ़रमाया तुम में से कोई उस वक़्त तक मोमिन कामिल नहीं होसकता जब तक कि में इस के नज़दीक इस के वालदैन, औलाद और तमाम लोगों से ज़्यादा महबूब ना होजाऊ‍ं।

आलिमा रेशमां बेगम ने कहा कि आज सारे मुसलमानों के दिलों में बेचैनी-ओ-इज़तिराबी कैफ़ीयत है उसे दूर करने के लिए अल्लाह का ज़िक्र कसरत से करने की ज़रूरत है। दिलों को सुकून हासिल करना है तो वो अल्लाह के ज़िक्र के ज़रीये हासिल करें। कारिया नाज़ मुहम्मदी ने कहा कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूदे शरीफ़ कसरत से पढ़ना बाइस सवाब और बाइस रहमत है। मुहम्मद नईमुद्दीन-ओ-दीगर साथीयों ने पसेपर्दा जलसे के इंतिज़ामात किए।

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