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ख़ातून आज़मीने हज्ज के लिए मज़ीद 200 नशिस्तें मुख़तस

प्रोफेसर एसए शकूर स्पेशल ऑफीसर आंध्र प्रदेश स्टेट हज कमेटी ने बताया हैके वज़ारत-ए-ख़ारजा ने मुल्क भर में ख़ातून आज़मीने हज्ज के लिए 200 नशिस्तें अलॉट की हैं, जिन के मुहर्रम का नाम क़ुरआ अंदाज़ी में आ चुका है लेकिन इन ख़वातीन ने हज 2014 के ल

प्रोफेसर एसए शकूर स्पेशल ऑफीसर आंध्र प्रदेश स्टेट हज कमेटी ने बताया हैके वज़ारत-ए-ख़ारजा ने मुल्क भर में ख़ातून आज़मीने हज्ज के लिए 200 नशिस्तें अलॉट की हैं, जिन के मुहर्रम का नाम क़ुरआ अंदाज़ी में आ चुका है लेकिन इन ख़वातीन ने हज 2014 के लिए दरख़ास्त नहीं दी थी।

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के क़ानून के मुताबिक़ कोई ख़ातून मुहर्रम के बगै़र फ़रीज़ा हज अदा नहीं करसकती। ताहम एसी ख़वातीन जो हज की अदायगी की ख़ाहिशमंद हैं जिन के मुहर्रम का नाम क़ुरआ अंदाज़ी में आ चुका है लेकिन वो रह गई हैं और आइन्दा मुहर्रम के साथ उनके हज करने के इमकानात नहीं हैं तो वो इस मौके से फ़ायदा उठाते हुए हज के लिए दरख़ास्त दे सकती हैं।

उन्होंने कहा कि हज कमेटी आफ़ इंडिया मेरिट की बुनियाद पर मौसूला दरख़ास्तों पर ग़ौर करेगी। मुक़र्ररा नशिस्तों से ज़्यादा तादाद में दरख़ास्तें वसूल होने की सूरत में क़ुरआ अंदाज़ी के ज़रीया दरख़ास्त गुज़ारों का इंतिख़ाब किया जाएगा।

एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हज कमेटी अबदुल हमीद ने कहा कि एसी ख़वातीन अपनी दरख़ास्तें 24 मई तक दे सकती हैं। दरख़ास्त गुज़ार ख़वातीन को एक इक़रारनामा के साथ हर लिहाज़ से मुकम्मिल ख़ानापुरी की हुई दरख़ास्तें दाख़िल की जानी चाहिऐं और इस अमरिकी भी वज़ाहत करनी चाहीए कि मुंतख़ब मुहर्रम के साथ हज 2014 के लिए दरख़ास्त दाख़िल ना करने की वजह क्या थी, उनकी उम्र किया है, हज 2014 के दौरान ख़ातून इस मुहर्रम के साथ ही क्युं हज के लिए जाना चाहती हैं। आने वाले बरसों में वो सफ़र हज क्युं नहीं कर सकतीं। उनके ख़ानदान में मौजूद शरई मुहर्रम की तफ़सीलात वग़ैरा। मज़ीद तफ़सीलात हज कमेटी के दफ़्तर वाक़्ये हज हाउज़ नामपली फ़ोन नंबर 040-23298793 से हासिल की जा सकती हैं।

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