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ख़ातून के पेट के अंदर से सर्जरी के ज़रीये कैंची निकाली गई, डाक्टरों की लापरवाही पर तशवीश

मैंगलोर के यूनिटी अस्पताल में शरीक एक ख़ातून के पेट से एक कैंची पीर के रोज़ निकाल ली गई जिस के बारे में बताया गया है कि ये कैंची चार साल क़ब्ल मैंगलोर नर्सिंग होम में हुए एक ऑप्रेशन के दौरान डाक्टरों की लापरवाही से ख़ातून के पेट के अंद

मैंगलोर के यूनिटी अस्पताल में शरीक एक ख़ातून के पेट से एक कैंची पीर के रोज़ निकाल ली गई जिस के बारे में बताया गया है कि ये कैंची चार साल क़ब्ल मैंगलोर नर्सिंग होम में हुए एक ऑप्रेशन के दौरान डाक्टरों की लापरवाही से ख़ातून के पेट के अंदर ही रह गई थी।

मैंगलोर में ख़ातून की स्कैनिंग रिपोर्ट जिस में डाक्टरों की लापरवाही से पेट के अन्दर रह जाने वाली कैंची को देखा जा सकता है।
मौसूला इत्तिलाआत के मुताबिक़ मैंगलोर के क़रीब देहात ( उलालके टेकर) की रहने वाली 35 साला ख़ातून हफ़सा का22 फरवरी 2010 को मैंगलोर नर्सिंग होम में बच्चादानी निकालने का एक अपरेशन हुआ था, जिस के दौरान डाक्टरों की लापरवाही से ऑप्रेशन में इस्तेमाल होने वाली कैंची पेट के अंदर ही रह गई थी।

हफ़सा ने बताया कि उसे पेट के दर्द की शिकायत रहती थी, मगर ऑप्रेशन का दर्द समझर उस को सहती रही, मगर गुज़शता रोज़ दर्द में ग़ैरमामूली इज़ाफ़ा हुआ तो हफ़सा ने मैंगलोर के एक माहिर डाक्टर से रुजू होते हुए अपनी परेशानी ज़ाहिर की। डाक्टर ने ज़रूरी जांच के बाद ख़ातून को मश्वरा दिया कि वो अपने पेट की स्कैनिंग करके रिपोर्ट ले आएं।

हफ़सा ने जैसे ही अपने पेट की स्कैनिंग की, हैरतअंगेज़ तौर पर पेट के अंदर कैंची पाई जाने की बात मालूम हुई। हफ़सा का कहना है कि इस ने आख़िरी ऑप्रेशन 22 फरवरी 2010 को ही किया था, जिसे मैंगलोर नर्सिंग होम की डाक्टर नीमा नायर और डाक्टर रोहन गिट्टी ने अंजाम दिया था, हफ़सा के मुताबिक़ इस ऑप्रेशन के बाद से ही उसे पेट में दर्द की शिकायत थी, इस ने अपने देहात के कई डाक्टरों से ईलाज किराया मगर पेट का दर्द ख़त्म नहीं हुआ।

ख़ातून ने स्कैनिंग रिपोर्ट की बुनियाद पर मैंगलोर ईस्ट के कद़री पुलिस थाना पहुंच कर मैंगलोर नर्सिंग होम के दो डाक्टरों के ख़िलाफ़ ऑप्रेशन के दौरान लापरवाही बरतने की शिकायत दर्ज कराई , जिस के बाद ख़ातून को शहर के यूनिटी अस्पताल में दाख़िल किया गया, जहां डाक्टरों की एक टीम पीर की शाम को सर्जरी के ज़रीये कैंची को पेन के अंदर से बाहर निकालने में कामयाब हो गए।

ऑप्रेशन के बाद डाक्टर अबदुल मजीद ने बताया कि ख़ातून को फ़िलवक़्त 48 घंटों तक के लिए आई सी यू में डाक्टरों की ख़ुसूसी निगरानी में रखा गया है । जिस के बाद ही वो ख़ातून की तबीयत के बारे में कुछ कह सकते हैं।

पीर की रात क़रीब 11:30 बजे डाक्टर अबदुल मजीद ने पूरे साढे़ तीन घंटों के ऑप्रेशन के बाद कैंची को बाहर निकालने के बाद अख़बारनवीसों को बताया कि कैंची पेट के अंदर रहने से पेट में काफ़ी इंफेक्शन हुआ है। उन्होंने बताया कि पेट के अंदर पाँच जगहों पर शदीद ज़ख़्म पैदा हो गए हैं, जिस की भरपाई के लिए क़रीब एक माह का वक़्त लग सकता है।

पेट के अंदर कैंची रह जाने की इत्तिला पर ना सिर्फ़ पूरे मैंगलोर में बल्कि डाक्टरों के हलक़ों में भी तशवीश की लहर दौड़ गई है कि किस तरह ऑप्रेशन में इस्तेमाल होने वाली कैंची पेट के अंदर ही छोड़ दी गई। डाक्टरों की इस तरह की लापरवाही पर पूरे शहर में अवाम सख़्त तशवीश में मुब्तिला हो गए हैं और हर आम व खास की ज़ुबान पर यही चर्चा जारी है।

बताया गया है कि पुलिस की हिदायत पर यूनिटी अस्पताल में ऑप्रेशन के दौरान कैंची बाहर निकालने की मुकम्मल विडियोग्राफी की गई है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर अदालत में पेश किया जा सकता है।इसी तरह पुलिस ने मुताल्लिक़ा कैंची को भी अपनी तहवील में ले लिया है।

अख़बारनवीसों से गुफ़्तगु करते हुए पुलिस के आला अहलकार ने बताया कि पुलिस पूरे मुआमले की जांच कर रही है जिस के बाद ही मैंगलोर नर्सिंग होम को नोटिस रवाना की जाएगी और अगली कार्रवाई उसी मुनासबत से आगे बढ़ाई जाएगी।

उउधर रियासत कर्नाटक के हेल्थ ऐंड फ़ैमिली वेलफ़ेयर वज़ीर यू टी क़ादिर ने डाक्टरों की इस क़दर लापरवाही पर सख़्त हैरत का इज़हार किया है।और ज़िला जुनूबी केनरा के डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफ़िसर को मुताल्लिक़ा मुआमले पर मुकम्मल रिपोर्ट हुकूमत को सौंपने की हिदायत दी है।

अख़बारनवीसों से गुफ़्तगु करते हुए यू टी क़ादिर ने बताया कि रिपोर्ट मौसूल होने के बाद मुताल्लिक़ा ज़िम्मा दारान के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ताज्जुब का इज़हार किया कि मैंगलोर नर्सिंग होम मैंगलोर का एक जाना माना अस्पताल है, ऐसे अस्पताल से इस तरह की लापरवाही की शिकायत मौसूल हुई है तो पता नहीं छोटे अस्पतालों और और मज़ाफ़ाती इलाक़ों के अस्पतालों में डाक्टर आख़िर किस तरह की ग़फ़लत बरतते होंगे।

उन्होंने कहा कि मैंगलोर नर्सिंग होम के डॉक्टर्स ज़्यादातर क़ाबिल समझे जाते हैं और यहां अच्छा ईलाज किया जाता है ,मगर इस अस्पताल के डाक्टरों से लापरवाही पर उन्हें सख़्त हैरत हुई है। उन्होंने यक़ीन दिलाया कि रिपोर्ट मौसूल होते ही मुताल्लिक़ा डाक्टरों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी |

‍‍बशुक्रिया: साहिल आनलाईन

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