ख़ान्गी स्कूलों में मुस्तहिक़ तलबा का मुफ़्त दाख़िला लाज़मी

ख़ान्गी स्कूलों में मुस्तहिक़ तलबा का मुफ़्त दाख़िला लाज़मी
बीदर,21जनवरी: मर्कज़ी हुकूमत ने गुज़िश्ता तालीमी साल से 15साल तक की उम्र के तमाम बच्चों के लिए मुफ़्त और लाज़मी तालीम के लिए आर ई क़ानून जारी किया है जो तमाम रियास्तों में नाफ़िज़ होचुका है लेकिन रियासत कर्नाटक में कई एक ख़ानगी स्कूल इंतिज़

बीदर,21जनवरी: मर्कज़ी हुकूमत ने गुज़िश्ता तालीमी साल से 15साल तक की उम्र के तमाम बच्चों के लिए मुफ़्त और लाज़मी तालीम के लिए आर ई क़ानून जारी किया है जो तमाम रियास्तों में नाफ़िज़ होचुका है लेकिन रियासत कर्नाटक में कई एक ख़ानगी स्कूल इंतिज़ामीया अब भी तलबा के दाख़िलों के सिलसिले में कई तरह के बहाने बनारहे हैं।दूसरी जानिब महिकमा तालीमात के ओहदेदारान की वजह से भी ज़्यादा तर दरख़ास्तें वसूल नहीं होरही हैं।

महिकमा तालीम ने अब उन मसाइल के पेशे नज़र हर ज़िले में तालीमी हेल्पलाइन शुरू की हैं जहां पर वालदैन और तलबा को आर टी ई क़ानून के तहत बच्चों के मयारी तालीमी इदारों में दाख़िलों के लिए रहनुमाई की जा रही है। गुज़िश्ता तालीमी साल के आग़ाज़ के वक़्त आर टी ई ऐक्ट पर अमल शुरू हुआ था लेकिन आम अफ़राद पूरी तरह से अपने इस हक़ तालीम के सिलसिले में ज़्यादा मालूमात हासिल नहीं कर पाए थे और आर टी ई क़ानून के तहत दाख़िले के लिए ख़ानगी मदारिस के लिए जितनी नशिस्तें महफ़ूज़ की गई थीं इन में सिर्फ़ 50फ़ीसद नशिस्तें ही भर्ती हुई थीं।

इमसाल तालीमी साल 2013‍‍‍‍‍‍_14 के लिए मदारिस में नए अस्बाक़ शुरू होने से छः माह क़ब्ल ही से हक़ तालीम क़ानून के तहत दरख़ास्तें दाख़िल करने और दाख़िलों की कार्रवाई शुरू की गई है। हक़ तालीम ऐक्ट को पूरी तरह समझ में नहीं आने के नतीजे में कई ख़ानगी मदारिस के लिए भी मसाइल पैदा होरहे हैं।दूसरी जानिब मुताल्लिक़ा इलाक़ों के साथ शामिल होकर वालदैन को बच्चों के दाख़िला के सिलसिले में हक़ मुहय्या नहीं कररहे हैं।

हुकूमत ने आर टी ई ऐक्ट में वालदैन की आमदनी की जो शरह मुक़र्रर की है इस मुआमले में भी ख़ानगी मदारिस और हुकूमत के दरमयान अभी कई उलझनें पाई जाती हैं। हुकूमत ने वाज़िह किया है कि जिन वालदैन की सालाना आमदनी साढे़ तीन लाख से कम है ऐसे वालदैन हक़ तालीम ऐक्ट के तहत बड़े प्राईवेट स्कूलों में अपने बच्चों का मुफ़्त दाख़िला करवा सकते हैं लेकिन दाख़िले के वक़्त उन के लिए अपनी आमदनी के सेर्टीफ़िकेट का दाख़िल करना लाज़मी क़रार दिया गया है।

आर टी ई ऐक्ट के तहत देही इलाक़ों के प्राईवेट स्कूलों में दाख़िला के सिलसिले में ज़्यादा सामने नहीं आरहे हैं। अलबत्ता शहरी इलाक़ों और शहरी मुज़ाफ़ात के मदारिस के मुआमले में कई एक शिकायतें मौसूल होरही हैं। शहरी इलाक़े में वार्ड की फ़हरिस्त रखी गई है। आप जिस कारपोरेशन या सिटी वार्ड में रहते हैं इस वार्ड के हुदूद में रहने वाले ख़ानगी स्कूलों में मुफ़्त दाख़िला की गुंजाइश है। शहरी हुदूद में ऐसे स्कूलों की एक पूरी फ़हरिस्त वार्ड की सतह पर तैयार करके वेबसाइट पर डाली गई है।

हुकूमत ने ये वाज़िह किया है कि महिकमा तालीमात से मंज़ूर शूदा ऐसे अक़ल्लीयती तालीमी इदारे जो हुकूमत की इमदाद हासिल नहीं कररहे हैं सिर्फ़ ऐसे ग़ैर इमदादी अक़ल्लीयती तालीमीइदारा जात को ही आर टी ई ऐक्ट से मुस्तसना क़रार दिया गया है अगर किसी को शुबा है कि कोई तालीमीइदारा सरकारी इमदाद हासिल कररहा है और इस के बावजूद ख़ुद को आर टी ई ऐक्ट से मुस्तसना क़रार दे रहा है तो ऐसे स्कूल के रजिस्ट्रेशन सेर्टीफ़िकेट की जांच पड़ताल की जा सकती है सिवाए अक़ल्लीयती तालीमी ग़ैर इमदादी इदारों के दूसरी तरह के ख़ानगी तालीमी इदारे हक़ तालीम ऐक्ट के तहत बच्चों य मुफ़्त दाख़िले से इनकार नहीं करसकते।

सिवाए ग़ैर इमदादी अक़ल्लीयती तालीमी इदारों के बक़ीया तमाम प्राईवेट तालीमीइदारा जात के लिए लाज़िमी है कि वो अपने नोटिस बोर्ड पर स्कूल के लिए मंज़ूर करदा आर टी ई नशिस्तों की तादाद का बाक़ायदा ऐलान करें और ये वाज़िह करें कि साल के दौरान यहां कितनी ऐसी सीटें तलबा को मुफ़्त दी गई हैं।

किसी भी तालीमीइदारा को इख़तियार नहीं है कि दाख़िला के लिए दरख़ास्त दाख़िल करते वक़्त ये बयान दे कि यहां सीट ख़ाली नहीं है और फिर दरख़ास्त मुस्तर्द नहीं की जा सकती। यहां सवाल ये पैदा होता है कि कितने सरकारी इमदाद हासिल करने वाले अक़ल्लीयती तालीमीइदारा जात हक़ तालीम ऐक्ट पर अमल कररहे हैं और अगर नहीं कररहे हैं तो इस ख़सूस में ख़ामोशी इख़तियार करने की ज़िम्मेदारी किन‌ पर आइद होती है?।

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