Monday , December 18 2017

ख़ुशहाली के साथ साथ सेहत भी बेहद ज़रूरी

नई दिल्ली, १४ सितंबर: कहते हैं कि हर काम वक़्त पर करने से इस में कोई बिगाड़ पैदा नहीं होता लोग कहते हैं कि मसरूफ़ ( ब्यस्त) लोग अपना कोई काम वक़्त पर नहीं करते इस के बावजूद भी वो ख़ुशहाल रहते हैं लेकिन माहिरीन का ये ख़्याल है कि जो लोग बाहर

नई दिल्ली, १४ सितंबर: कहते हैं कि हर काम वक़्त पर करने से इस में कोई बिगाड़ पैदा नहीं होता लोग कहते हैं कि मसरूफ़ ( ब्यस्त) लोग अपना कोई काम वक़्त पर नहीं करते इस के बावजूद भी वो ख़ुशहाल रहते हैं लेकिन माहिरीन का ये ख़्याल है कि जो लोग बाहर से ख़ुशहाल नज़र आते हैं दरअसल उन की ज़िंदगी का निज़ाम उल-अमल इंतिहाई बिगड़ा हुआ होता है ।

ख़ुशहाली का मतलब ये नहीं कि लोग डॉक्टर्स के मरहून-ए-मिन्नत हो जाएं । आज तक़रीबन बड़े घरानों का यही हाल है । ब्रेक फास्ट लंच और डिनर मीटिंग्स के नाम पर मुर्ग़न ग़ज़ाओ की इफ़रात से उन के हाज़मा का निज़ाम बिगड़ जाता है । लंच मीटिंग पाँच बजे और डिनर मीटिंग रात के एक बजे मुनाक़िद ( आयोजित) होती है और खाना भी इसी मुनासबत ( अनुपात) से नोश किया जाता है ।

तिजारती घरानों की पार्टीयों में शराब का भी इस्तिमाल होता है जिस से इंसान रात में देर से खाना नोश करने के बाद बेख़बरी की नींद तो सो जाता है लेकिन ग़िज़ा हज़म नहीं हो पाती । नतीजा ये होता है कि दूसरी सुबह सर में शदीद ( शख्त) दर्द और जिस्म में खिँचाव महसूस होता है जिस के अज़ाला (रोकथाम/ दूर करने ) के लिए मुख़्तलिफ़ हरबे इस्तेमाल किए जाते हैं ।

अगर यही ख़ुशहाली की देन है तो इस से आख़िर फ़ायदा किस का है ? लिहाज़ा हर काम अपने वक़्त पर किया जाय तो ख़ुशहाली के साथ साथ सेहत भी बरक़रार रहती है । सेहत अच्छी ना होतो ख़ुशहाली किस काम की । लिहाज़ा इस बात का ख़्याल रखना चाहीए कि हमें सेहत के साथ ख़ुशहाली मिले ।

TOPPOPULARRECENT