Saturday , December 16 2017

ग़रीब ख़ानदानों के मकानात मुनहदिम

हैदराबाद मेट्रो रेल के बड़े प्रोजेक्ट की तामीर में ग़रीब ख़ानदानों को बेघर कर दिया गया है। मुआवज़ा के नाम पर इंसाफ़ करने में नाकाम हैदराबाद मेट्रो रेल के ओहदेदारों ने चादर घाट, धोबी घाट से मुत्तसिल तक़रीबन 31 ग़रीब ख़ानदानों के घर उजाड़ रहे हैं।

चादर घाट सिटी मॉडल स्कूल के पीछे वाक़े इस ग़रीब बस्ती के अफ़राद अपने मकानात उजड़ जाने के बाद बे यारो मददगार रात सड़कों पर गुज़ारने पर मजबूर हैं और उन अफ़राद में ऐसे ख़ानदान भी मौजूद हैं, जो 20 ता 25 साल से इस मुक़ाम पर हैं। उन के बच्चे बड़े भी इसी बस्ती में हुए और उन की शादियां भी यहीं अंजाम पाई।

एक ख़ौफ़नाक साये की तरह मेट्रो रेल प्रोजेक्ट ने उन की ज़िंदगीयां तबाह और बर्बाद कर डालीं। शहर को आलमी म्यार का और ख़ूबसूरत तरीन शहर बनाने की दौड़ में हुकूमत के इक़्दामात ग़रीबी को हटाने के बजाय ग़रीब को हटाने के मुतरादिफ़ साबित हो रहे हैं जबकि इस तरक़्क़ी याफ़्ता शहर की तारीख़ ने हर बेघर को सहारा दिया लेकिन अब घर का सहारा भी छीन लिया जा रहा है।

चादर घाट, धोबी घाट में ज़िंदगी बसर करने वाले ख़ानदानों की दर्दभरी दास्तानें पाई जाती हैं जिन में एक ख़ानदान नाज़िया बेगम का भी है जो अपने तीन बच्चों के इलावा अपनी बहन के 5 यतीम बच्चों की कफ़ालत भी करती हैं।

उन के मकान को तोड़ दिया गया। नाज़िया बेगम के शौहर मुहम्मद रज़ाक़ पेशा से ऑटो ड्राईवर हैं। ये ख़ानदान अब सड़क पर है। एक तरफ़ अपने साज़ो सामान की निगरानी तो एक तरफ़ अपने और बहन के बच्चों की निगरानी और गुज़र बसर मुश्किल हो गया। मेट्रो रेल प्रोजेक्ट ने इस ख़ानदान की ज़िंदगी बसर करना मुहाल कर दिया है।

ये ख़ानदान तक़रीबन 15 साल से इस बस्ती में रहता है। बहन की मौत के बाद बहनोई के अचानक लापता और फरारी अख़्तियार करने के बाद उस बहन ने इन बेसहारा और यतीम बच्चों को सहारा दिया और 5 साल से उन की परवरिश कर रही हैं जो अब खुले आसमान के नीचे ज़िंदगी बसर कर रहे हैं।

बताया जाता हैकि इस अराज़ी के पट्टेदारों को मुआवज़ा दे दिया गया जबकि क़ब्ज़ा दारों को कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया। 15 ता 20 साल से मुक़ीम इन ग़रीब ख़ानदानों को क़ानून के लिहाज़ से 60 फ़ीसद और पट्टेदारों को 40 फ़ीसद मुआवज़ा दिया जाना चाहीए जबकि उन के हक़ में कोई भी इक़्देमात नहीं किए गए।

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