Wednesday , November 22 2017
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ज़ात पर मुब्नि मर्दम शुमारी के अदाद व शुमार की आशाअत पर रोक

मर्कज़ की कॉंग्रेस कियादत वाली यूपीए सरकार पार्लियामनी इंतिखाबा से पहले मजहब और ज़ात की नाम पर सियासत की रोटी सेकने वाले रहनुमाओं सी किसी तरह की दुश्मनी मोल लेना नहीं चाहती है। यही वज़ह है की मर्कज़ी हुकूमत ने ज़ात पर मुब्नि मर्दम शुम

मर्कज़ की कॉंग्रेस कियादत वाली यूपीए सरकार पार्लियामनी इंतिखाबा से पहले मजहब और ज़ात की नाम पर सियासत की रोटी सेकने वाले रहनुमाओं सी किसी तरह की दुश्मनी मोल लेना नहीं चाहती है। यही वज़ह है की मर्कज़ी हुकूमत ने ज़ात पर मुब्नि मर्दम शुमारी 2011 की अदाद व शुमार की आशाअत पर रोक लगा दी है। जबकि इसी हुकूमत ने आज़ाद हिंदुस्तान में पहली बार बड़ी ही ज़ोरशोर से समाजी, इक़्तेसादी और ज़ात पर मुब्नि मर्दम शुमारी कराने का ऐलान किया था। मुल्क में रहने वाली सभी जातों से मुतल्लिक़ सही जानकारी जमा करने की मक़सद से बड़े पैमाने पर इन्फोर्मेशन टेक्नालजी का इस्तेमाल किया गया।

महकमा देही तरक़्क़ीयात से मिली जानकारी के मुताबिक महकमा देही तरक़्क़ीयात मर्कज़ी हुकूमत ने समाजी इक़्तेसादी और ज़ात पर मुब्नि मर्दम शुमारी 2011 से मुतल्लिक़ अदाद और शुमार में सिर्फ समाजी, इक़्तेसादी अदाद शुमार को आम करने की हिदायत दी है जबकि ज़ात और मजहब से मुतल्लिक़ अदाद और शुमार की आशाअत पर रोक लगा दी गयी है।

ज़ात पर मुब्नि मर्दम शुमारी की मुताबिक बिहार में दर्ज़ फेहरिस्त ज़ात की आबादी 15.9 फीसद हो गयी है जबकि 2001 की मर्दम शुमारी में ये 15.7 फीसद थी। इसी तरह दर्ज़ फेहरिस्त क़बायल की आबादी 1.3 फीसद हो गयी जबकि 2001 की मर्दम शुमारी में उनकी आबादी 0.9 फिसद थी। समझा जाता है की पार्लियामनी इंतिखाब से पहले ज़ात पर मुब्नि मर्दम शुमारी के अदाद व शुमार शाया होने से मुखतलिफ़ ज़ात के रहनुमा अपनी आबादी की बुनियाद पर टिकट के दावेदारी पेश करेंगे।

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