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ज़िन्दा दिलाँ हैदराबाद की दो रोज़ा सालाना तक़ारीब

ज़िन्दा दिलाँ हैदराबाद की दो रोज़ा सालाना तक़ारीब के मौक़े पर अदबी इजलास 17 अक्टूबर की शाम 6 बजे नुमाइश कलब में मुनाक़िद होगा। सदारत आलमगीर शौहरत याफ़ता मज़ाह निगार पद्मश्री मुज्तबा हुसैन करेंगे। पिछले निस्फ़ सदी से मुनाक़िद होने वाले इन इ

ज़िन्दा दिलाँ हैदराबाद की दो रोज़ा सालाना तक़ारीब के मौक़े पर अदबी इजलास 17 अक्टूबर की शाम 6 बजे नुमाइश कलब में मुनाक़िद होगा। सदारत आलमगीर शौहरत याफ़ता मज़ाह निगार पद्मश्री मुज्तबा हुसैन करेंगे। पिछले निस्फ़ सदी से मुनाक़िद होने वाले इन इजलासों में मज़ाहीया मज़ामीन पढ़े जाते हैं।

जिस में सामीन बड़ी तादात‌ में शरीक होते हैं और तीन ता चार घंटे प्रोग्राम क़हक़हों और तहसीन के दरमियान जारी रहता है। नस्र को मुशायरा के तर्ज़ पर सुनने की मुनफ़रद रिवायत ख़ालिसता ज़िन्दा दिलाँ हैदराबाद की देन है। माज़ी में कृष्ण चन्द्र , यूसुफ़ नाज़िम , फ़िक्र तौंसवी , दिलीप सिंह , रशीद कुरैशी , हाशिम अली अख़तर , नरेंद्र लूथर , भारत चंद खन्ना , मसीह अंजुम , डाक्टर हबीब ज़िया , परवेज़ुल्लाह मह्दी , ने इन इजलासों में मज़ामीन सुनाकर महफ़िलों को लौटा है।

अदबी इजलास में शिरकत के लिये इस मर्तबा मुल्क के मशहूर मज़ाह निगार फ़य्याज़ अहमद फ़ैज़ी ( मुंबई ) , डाक्टर हलीमा फ़िर्दोस (बैंगलौर ), डाक्टर फ़र्ज़ाना फ़रह ( भटकल ) , डाक्टर अब्बास मुत्तक़ी , डाक्टर मुमताज़ मह्दी और हमीद आदिल ने अपनी शिरकत की तौसीक़ करदी है। 18 अक्टूबर की सुबह 10-30 बजे महफ़िल लतीफ़ा गोई नुमाइश क्लब में और शाम 7 बजे ललित कलाथोरानम बाग़ आम्मा पर कुल हिंद मज़ाहीया मुशायरा मुक़र्रर है।

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