फ़र्ज़ी एंकाउंटर्स की रिपोर्ट देने सुप्रीम कोर्ट की हिदायत

फ़र्ज़ी एंकाउंटर्स की रिपोर्ट देने सुप्रीम कोर्ट की हिदायत
नई दिल्ली, २६ जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने ही साबिक़ जज की क़ियादत में चलाई जा रही मॉनीट्रिंग अथॉरीटी को हिदायत की है कि वो गुजरात में 2002 से 2006 के दरमयान होने वाली हलाकतों और फ़र्ज़ी एंकाउंटर्स की एक तफ़सीली रिपोर्ट अंदरून ती

नई दिल्ली, २६ जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने ही साबिक़ जज की क़ियादत में चलाई जा रही मॉनीट्रिंग अथॉरीटी को हिदायत की है कि वो गुजरात में 2002 से 2006 के दरमयान होने वाली हलाकतों और फ़र्ज़ी एंकाउंटर्स की एक तफ़सीली रिपोर्ट अंदरून तीन माह तैयार करके दाख़िल करे।

हुकूमत गुजरात ने फ़ाज़िल अदालत के साबिक़ जज ऐम ऐस शाह को गुज़श्ता साल अप्रैल में तक़र्रुरी अमल में आई थी जिस में उन्हें मज़कूरा बाला मुद्दत के दौरान हुए फ़र्ज़ी एंकाउंटर की तफ़सीली रिपोर्ट तैयार करने की ज़िम्मेदारी तफ़वीज़ की गई थी लिहाज़ा सुप्रीम कोर्ट का इस्तेदलाल है कि अब जबकि एक मॉनीट्रिंग अथॉरीटी की तशकील अमल में आई है और एक साबिक़ जज को अथॉरीटी का सदर नशीन मुक़र्रर किया गया है तो अब ये ज़रूरी हो जाता है कि वो अपने फ़राइज़ की अंजाम दही करते हुए फ़र्ज़ी
एंकाउंटर्स मुआमले की छानबीन करें।

जस्टिस आफ़ताब आलम और सी के प्रसाद पर मुश्तमिल एक बैंच ने कहा कि फ़र्ज़ी एंकाउंटर्स मुआमला की तहक़ीक़ात कुछ इस अंदाज़ से होनी चाहीए कि हर फ़र्ज़ी एंकाउंटर के पसेपुश्त सच्चाई सामने आ जाए। याद रहे कि 2002 ता 2006 फ़र्ज़ी एंकाउंटर्स मुआमले में गुजरात के मुस्लमानों को ये शिकायत है अक़ल्लीयती फ़िर्क़ा से ताल्लुक़ रखने वाले अफ़राद को चुन चुन कर निशाना बनाया जा रहा है।

उन्हें दहश्तगर्द क़रार देते हुए फ़र्ज़ी एंकाउंटर के नाम पर हलाक किया जा रहा है। इशरत जहां केस ने ना सिर्फ मुल्क गीर बल्कि आलमगीर पैमाने पर सब की तवज्जा अपनी जानिब मबज़ूल करली है जहां कुछ तल्ख़ सच्चाईयां ज़रूर सामने आई हैं लेकिन अब भी बाअज़ हक़ायक़ पसेपर्दा हैं।

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