Thursday , July 19 2018

फ़िरक़ा वाराना तशद्दुद रोकने के लिए बने कानून

वज़ीरे आला नीतीश कुमार ने कहा है कि फ़िरक़ा वाराना तशद्दुद को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है। सख्त कानून बनाने की बहस तो बहुत दिनों से चल रही है। अब इसे अमली जामा पहनाने की जरूरत है। इसके लिए रियासतों के साथ सियासी सतह पर त

वज़ीरे आला नीतीश कुमार ने कहा है कि फ़िरक़ा वाराना तशद्दुद को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है। सख्त कानून बनाने की बहस तो बहुत दिनों से चल रही है। अब इसे अमली जामा पहनाने की जरूरत है। इसके लिए रियासतों के साथ सियासी सतह पर तबादीला ख्याल होना चाहिए। महज इंतेजामी सतह पर तबादिला काफी नहीं है। मंगल को वह कैबिनेट की बैठक के बाद सहाफ़ियों से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि गुजिशता दिनों भारत सरकार के दाख्ला सेक्रेटरी ने तमाम रियासतों के दाख्ला सेक्रेटरीयों की बैठक बुलायी थी। हमारी राय थी कि फ़िरक़ा वाराना तशद्दुद को रोकने के लिए मुनासिब कानून बनना चाहिए। हम इसके हिमायती हैं। जो रियासत फ़िरक़ा वाराना तशद्दुद को रोकने में कोताही बरतते हैं, वैसे रियासतों के फ़िरक़ा वाराना तशद्दुद मुतासीर इलाकों को मरकज़ी हुकूमत डिस्टर्ब एरिया का ऐलान करके बराहे रास्त मुदाखिलत करे। मर्कज़ी फोर्स के जरिये फ़िरक़ा वाराना तशद्दुद को रोके और तशद्दुद के शिकार लोगों को मुनासिब मुआवजा मिले। उन्होंने कहा कि 1990 में भागलपुर फसाद हुआ था। फसाद में मुजरिम लोगों को सुबूत रहते हुए भी तहक़ीक़ात के जरिये इलज़ाज से आज़ाद कर दिया गया था।

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