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फ़ौजी सरबराह के ख़िलाफ़ फ़ोन टेपिंग के इल्ज़ाम की तहक़ीक़ात

वज़ारत-ए-दिफ़ा ने फ़ौजी सरबराह की जानिब से अहम फ़ोन काल्स के बारे में मालूमात हासिल करने के लिए जासूसों की ताय्युनाती से मुताल्लिक़ शिकायत की तहक़ीक़ात शुरू कर दी है जब कि फ़ौजी सरबराह जनरल वि के सिंह ने इस इल्ज़ाम को यकसर मुस्तर्द क

वज़ारत-ए-दिफ़ा ने फ़ौजी सरबराह की जानिब से अहम फ़ोन काल्स के बारे में मालूमात हासिल करने के लिए जासूसों की ताय्युनाती से मुताल्लिक़ शिकायत की तहक़ीक़ात शुरू कर दी है जब कि फ़ौजी सरबराह जनरल वि के सिंह ने इस इल्ज़ाम को यकसर मुस्तर्द करते हुए उसे फ़र्ज़ी क़रार दिया ।

वज़ारत-ए-दिफ़ा को गुज़श्ता हफ़्ता नामालूम शख़्स से एक तफ़सीली शिकायत मौसूल हुई जिसमें फ़ौजी सरबराह के ख़िलाफ़ कई इल्ज़ामात आइद किए गए हैं जिनमें एक ये भी है कि वो नई दिल्ली में अहम फ़ोन काल्स की तफ़सीलात हासिल किया करते थे । इस मक़सद के लिए उन्हों ने ख़ुसूसी नुमाइंदे मुक़र्रर किए थे ।

वज़ारत-ए-दिफ़ा ने ये मकतूब मौसूल होने के बाद इल्ज़ामात की तहक़ीक़ात शुरू कर दी है । दूसरी तरफ़ हैदराबाद में एक किताब की रस्म इजरा के मौक़ा पर अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए जनरल वी के सिंह ने कहा कि अफसानों पर रद्द-ए-अमल ज़ाहिर नहीं किया जाता ।

अगर लोग मनमानी कहानियां ब्यान करते हैं और ग़ैर ज़िम्मेदार एडीटर्स ऐसी कहानियां शाय भी कर देते हैं तो उसे अफ़साना ही कहा जाएगा और उन्हों ने कहा है कि अफ़साने पर रद्द-ए-अमल ज़ाहिर नहीं किया जाता।

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