संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार संस्था ने सऊदी सरकार विरोधी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या के बारे में सऊदी अरब के ट्रायल को अपर्याप्त क़रार देते हुए कहा है कि इस प्रकार ट्रायल की पारदर्शिता की समीक्षा नहीं की जा सकती।
अलजज़ीरा टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार संस्था के प्रवक्ता रवीना श्यामदसानी ने अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को शामिल करके मामले की स्वतंत्रतापूर्वक जांच की मांग की है।
उनकी यह मांग सऊदी प्रास्क्यूटर की ओर से मामले में पांच संदिग्ध लोगों को सज़ाए मौत दिए जाने के आदेश के बाद सामने आई है। रविनाश्यामदसानी का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने हमेशा सज़ाए मौत का विरोध किया है।
अदालत ने इस मुक़दमे के पहले ही दिन 11 में से 5 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सज़ा सुना दी, इससे यह स्पष्ट होता है कि मुक़दमे की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही इन लोगों की सज़ा पर फ़ैसला हो चुका था।
सऊदी पत्रकार ख़ाशुक़जी को 2 अक्तूबर 2018 को इस्तांबुल स्थित सऊदी कांसूलेट में बहुत ही निर्मम तरीक़े से क़त्ल कर दिया गया था। तुर्क सरकार और अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए का कहना है कि उनके पास इस बात के पुख़्ता सुबूत हैं कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ख़ाशुक़जी की हत्या का आदेश दिया था।
विश्व समुदाय के भारी दबाव के बाद सऊदी शासन ने 22 लोगों को ख़ाशुक़जी की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किया है। निःसंदेह यह लोग इस जघन्य अपराध में शामिल रहे होंगे, लेकिन यह अदालती कार्यवाही मुख्य आरोपी मोहम्मद बिन सलमान को बचाने और सऊदी अरब से विश्व समुदाय के दबाव को कम करने के उद्देश्य से की जा रही है।
साभार- ‘parstoday.com’