निजी स्कूलों को अधिक प्रोत्साहन देगा चीन

   

बीजिंग, 22 जून । चीन में अधिकांश स्कूल सरकारी स्वामित्व वाले होते हैं, जबकि निजी स्कूलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। हाल के वर्षो में सरकारी स्कूलों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार कुछ कदम उठा रही है। इसी कड़ी में एक नया कानून बनाने पर जोर दिया गया है, जिसका मकसद प्राइवेटस्कूलों का स्तर बेहतर करने के लिए समर्थन देना है।

चीनी स्टेट काउंसल की ओर से जारी अध्यादेश के मुताबिक, स्थानीय सरकारों को निजी स्कूलों के ढांचागत सुधार व विकास के लिए नीतिगत समर्थन प्रदान करना होगा। कहा गया है कि इस तरह के स्कूलों को जमीन के इस्तेमाल में प्राथमिकता देने के साथ-साथ सब्सिडी व टैक्स में छूट दी जानी चाहिए।

स्टेट काउंसल की ओर से जारी संशोधित अध्यादेश में इस बात पर बल दिया गया है कि किस तरह से शिक्षा के क्षेत्र में निजी सेक्टर की भागीदारी को बढ़ाया जाय। बताया जाता है कि यह नया नियम आगामी 1 सितंबर से प्रभावी होगा। इसके तहत गैर लाभकारी निजी स्कूलों को छात्र व्यय व शिक्षकों के वेतन के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के स्कूलों की तरह खर्च आदि में छूट दी जाए। उन्हें भी सरकारी स्कूलों की भांति जमीन के उपयोग में प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है।

नया आदेश कहता है कि राज्य सरकारों को नए गैर-लाभकारी निजी स्कूलों व अपना विस्तार करने के इच्छुक स्कूलों को निशुल्क जमीन मुहैया करानी चाहिए। इससे जाहिर होता है कि चीन सरकार छात्रों को पढ़ाई के लिए स्कूल चुनने के और अधिक विकल्प मुहैया कराने की दिशा में प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों के वेतन, बीमा व अन्य बातों पर ध्यान देने के लिए जोर दिया जा रहा है।

चीनी शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, चीन में 1 लाख 86 हजार 700 निजी स्कूल हैं, जो कि देश के कुल शैक्षणिक संस्थानों का लगभग एक तिहाई हैं। इसके साथ ही पिछले साल इन निजी स्कूलों से पढ़ कर साढ़े पांच करोड़ से अधिक छात्र निकले, जो देश के सभी स्कूलों का पांचवां हिस्सा हैं।

यहां बता दें कि भारत में जहां निजी स्कूलों का बोलबाला है, इसके उलट आपको चीन में बहुत कम प्राइवेट स्कूल या विश्वविद्यालय देखने को मिलेंगे। अगर जो हैं भी उनकी विश्वसनीयता सरकारी स्कूलों की तरह नहीं है। अगर नया नियम लागू हुआ तो चीन में निजी क्षेत्र के स्कूलों की संख्या व गुणवत्ता में सुधार होगा।

(अनिल पांडेय, पेइचिंग)

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