विपक्ष क्या करे: देवेगौड़ा

   

कोलकाता में हुई विशाल जन.सभा के बारे में मैंने कल लिखा था। आज मैं महागठबंधन के बारे में लिखूंगा। देश की चार.पांच छोटी.बड़ी पार्टियों के अलावा वहां सभी का जमावड़ा था लेकिन क्या यह जमावड़ा किसी महागठबंधन में बदल सकता है घ् ऐसे पांच.छह जमावड़े अभी देश में और भी होने हैं।

इससे देश में नेतृत्व.परिवर्तन का माहौल तो खड़ा हो जाएगा लेकिन जैसा कि हमारे गांवों में एक कहावत है कि ष्काणी के ब्याह में सौ.सौ जोखिमष् हैं। यह महागठबंधनए महागड़बड़ बंधन भी सिद्ध हो सकता है। क्या यह संभव है कि 31 प्रतिशत वोट की मोदी सरकार को यह 70.75 प्रतिशत वोटों से गिरा देगा घ् यह आसान नहीं हैं। कोलकाता में हुए नेताओं के भाषण काफी दमदार थे लेकिन सबसे काम की बात पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने की है। उन्होंने इस नए गठबंधन के मार्ग में आनेवाले रोड़ों के सवाल उठाए हैं।

उनका पहला सवाल तो यह था कि जिन दलों के नेता कोलकाता में एक ही मंच पर जुट गए हैंए वे अलग.अलग प्रांतों में आपस में भिड़ने के लिए मजबूर हैं। जैसे दिल्ली में आप पार्टी और कांग्रेस और उप्र में सपा.बसपा और कांग्रेसए पंण्बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल तथा कश्मीर में भी यही हाल है। ओडिशा की अपनी अलग पटरी है और केरल की भी। कर्नाटक मेें भी कौन कितनी सीट लेगाए कुछ पता नहीं। देवेगौड़ाजी का कहना है कि इन अन्तर्विरोधों का समाधान पहले होना चाहिए।

इस गठबंधन को कहीं सीटों का यह बंटवारा ही न ले बैठे। दूसरी बात उन्होंने कही कि मानो आपने मोदी को हटा दिया लेकिन आप उसके बाद करेंगे क्या घ् क्या आप भी मोदी की तरह जुमलेबाजी करके लोगों को वायदों की फिसलपट्टी पर चढ़ा देंगे घ् आप एक ठोस घोषणा.पत्र क्यों नहीं तैयार करते घ् जिसके आधार पर लोगों की सच्ची सेवा हो सके।

तीसरा बात उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण कही कि भाजपा के हर उम्मीदवार के विरुद्ध विपक्ष का सिर्फ एक ही उम्मीदवार होना चाहिए। यदि ऐसा हो जाए तो आज तो कोई लहर नहीं है। 2014 की कांग्रेस.विरोधी लहर में यदि मोदी को सिर्फ 31 प्रतिशत वोट मिले थे तो उनकी संख्या अब तो आधी तक घट सकती है।

याने भाजपा को 100 सीटें भी मिल जाएं तो गनीमत है। आज भारत की राजनीति से सिद्धांत और विचारधारा का पलायन हो चुका है। सत्ता ही सत्य हैए बाकी सब मिथ्या है। सत्ता से सेवा और सेवा से सत्ता ली जाए तो भी कुछ बुरा नहीं है। यही बात देवगौड़ाजी ने कही है।

डॉ. वेदप्रताप वैदिक