1. 25 लाख रुपए के गाय के गोबर की हुई चोरी, कर्नाटक पुलिस कर रही है चोरों की तलाश

1. 25 लाख रुपए के गाय के गोबर की हुई चोरी, कर्नाटक पुलिस कर रही है चोरों की तलाश

नई दिल्ली : कृषि प्रधान देश भारत में किसान और ग्रामीण गोबर को बहुत महत्व देते हैं, इसे खेती के लिए उर्वरक के रूप में उपयोग करते हैं और घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए इसके सूखे गोबर को जलाते हैं। बिरूर क्षेत्र में कुछ दिन पहले पशुपालन विभाग ने TimesNowNews को सूचना दी के कर्नाटक की पुलिस उन चोरों की तलाश कर रही है, जो एक सुविधा क्षेत्र से चुराए गए 25 से 40 ट्रक गाय के गोबर है जिसकी कीमत 125,000 रुपए की है। स्थानीय पुलिस स्टेशन में पशुपालन विभाग ने “लापता सामान” रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चोरी की गई गाय के गोबर को बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पशुपालन विभाग के साथ संयुक्त निदेशक ने चोरी की शिकायत के साथ यागती पुलिस स्टेशन का रुख किया।”


चोरी किया हुआ गोबर एक निजी व्यक्ति की भूमि पर पाया गया था। एक अधिकारी ने कहा कि इसे जल्द ही संबंधित विभाग को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने पशुपालन विभाग में काम करने वाले एक पर्यवेक्षक को गिरफ्तार किया है और मामले की आगे की जांच कर रही है। वे उन सुरागों की तलाश में हैं जो अधिक विभाग के अधिकारियों की भागीदारी की ओर इशारा कर सकते हैं।

भारत में, गाय देश के हिंदू-बहुसंख्यक समाज में धार्मिक और सामाजिक महत्व के साथ एक प्रतिष्ठित जानवर है। ग्रामीण परिवारों के लिए, “पवित्र गाय” को श्रद्धा के साथ माना जाता है, क्योंकि यह पोषण के लिए दूध प्रदान करता है, कृषि कार्य में मदद करता है, और गाय के गोबर को फसल के लिए खाद के रूप में संग्रहित किया जाता है, साथ ही सूखे गोबर जलावन के काम भी आते हैं। लकड़ी की आपूर्ति सीमित होने पर बरसात के दिनों में जलने के लिए ऊर्जा स्रोत के रूप में काम लिया जाता है।

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